भगवान भरोसे

यदि वास्तव में टेंडर निरस्त हो चुके हैं तो यह मान लिया जाना चाहिए कि नगर पालिका भगवान भरोसे ही चल रही है। शौचालय के लिए आवेदन करने वालों को भी भगवान पर ही भरोसा करना चाहिए।
– जय एस. चौहान –
बिजयनगर नगर पालिका खुले में शौच मुक्त के लिए पुरस्कृत हो चुकी है। 25 में से सिर्फ दो वार्ड खुले में शौच मुक्त नहीं है। पांच -छह माह पूर्व हुए सर्वे के बाद लिए गए आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। हालांकि कुछ लोगों को
पहली किश्त जारी हो चुकी है लेकिन दूसरी किश्त के इंतजार में निर्माणाधीन शौचालय अधूरा पड़ा है। यानी कि परिणाम शून्य।
उपलबधियाँ अक्सर स्मरण ही रहती हैं। इससे किसी को एतराज भी नहीं होना चाहिए। पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला को यह स्मरण तो है कि प्रदेश में बिजयनगर सहित कुल पांच नगर पालिकाएं खुले में शौच मुक्त है। लेकिन इसका भान नहीं कि शौचालय के लिए आवेदन करने वालों की फाइलें कहां अटकी हैं। शौचालय के लिए आवेदकों के पगफेरे से अब पालिका की नायाब सड़कें घिसने लगी हैं। रही बात वार्ड 19 में सुलभ शौचालय निर्माण की बात तो पालिका अध्यक्ष और वार्ड 19 के पार्षद के बयान विरोधाभासी हैं। पालिका अध्यक्ष का कहना है कि सुलभ शौचालय के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं जबकि वार्ड पार्षद का कहना है कि टेंडर निरस्त हो चुके हैं। यदि वास्तव में टेंडर निरस्त हो चुके हैं तो यह मान लिया जाना चाहिए कि नगर पालिका भगवान भरोसे ही चल रही है।
शौचालय के लिए आवेदन करने वालों को भी भगवान पर ही भरोसा करना चाहिए। हालांकि नगर पालिका क्षेत्र में बनाई गई नायाब सड़क से लेकर सफाई व्यवस्था तक सब कुछ भगवान भरोसे ही चल रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि नगर पालिका कम से कम शौचालयविहीन लोगों की पीड़ा महसूस कर उनके आवेदनों पर त्वरित राहत की तैयारी करेगी।

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