हे प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं…

  • Devendra
  • 23/03/2019
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शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर ‘एक शाम सेना के शौर्य के नाम’ कार्यक्रम आयोजित
बिजयनगर। अखिल भारतीय विद्याथी परिषद इकाई बिजयनगर एवं स्थानीय दोस्ती ग्रुप 27 मील चौराहा के संयुक्त तत्वावधान में शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार 22 मार्च को ‘एक शाम सेना के शौर्य के नाम’ कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय महावीर बाजार विवेकानन्द चौराहा पर किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत मां भारती एवं अमर शहीदों के तस्वीरों के समक्ष शहीद रशीद कठात की मां नजीर बानो ने दीप प्रज्ज्वलन कर की। इसके बाद नसीराबाद छावनी से आमंत्रित सैनिकों के दल का स्वागत कर कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया।

कार्यक्रम के शुरूआत में सैनिकों के दल ने एक बड़ा ही भावुक और देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत लहू अब न दे तू चमन के लिए, मेरी जां जाए वतन के लिए… प्रस्तुत किया। इस पर कार्यक्रम में मौजूद सैकड़ों श्रोतागण गीत गुनगुनाते हुए देशभक्ति रस में डूब गये। इसके बाद कार्यक्रम में मौजूद कवि हेमंत चौबे, रितेश सोनी, मालुपरा से पधारे कविराज कौशलेन्द्र एवं रशीद निर्मोही का स्वागत किया गया। इसके बाद पीहू एंड ग्रुप द्वारा ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी, जो शहीद हुए है उनकी जरा याद करो कुर्बानी… आदि पर नृत्य प्रस्तुत कर सबकों को देशभक्ति भाव में डुबने पर विवश कर दिया। मंच पर मसूदा क्षेत्र के अमर शहीद रशीद कठात की मां नजीर बानो, पत्नि एवं बेटे का स्वागत कर उनका अभिनन्दन किया गया।

इस मौके पर अमर शहीद कठात की मां ने मंच को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैंने अपने बेटे को सेना में देश की सेवा के लिए भेजा जहां वो देश की सेवा करते हुए शहीद हो गया, इसका मुझे बहुत दु:ख है। लेकिन आज इस कार्यक्रम में आने के बाद ऐसा लगा कि पूरे देश के बेटे मेरे अपने बेटे जैसे है। इसी क्रम में निकटवर्ती ग्राम झींपिया के सीआरपीएफ के जवान मनीष एवं उनके पिता को मंच पर आमंत्रित कर उनका स्वागत और अभिनन्दन किया गया। विदित हो कि मनीष उसी सीआरपीएफ दल में तैनात थे जिस दल पर आतंकियों ने कायराना हमला किया था।

इसके पश्चात स्थानीय फैथ एकेडमी माध्यमिक विद्यालय द्वारा जम्मू के उरी सेक्टर में हुए आतंकी हमले और उसके जवाब में भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर एक नाटक का मंचन कर सभी दर्शकों को टकटकी लगाकर देखने पर विवश कर दिया। मंच का संचालन करते हुए कवि हेमंत चौबे ने खुलकर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला और कहा कि सुन ओ पाकिस्तान तुम अगर खीर मांगोगे तो हम तुम्हें दूध और चांवल देंगे लेकिन पक्की पकाई खीर नहीें देंगे, अरे कश्मीर तो क्या तुम्हें कश्मीर की तस्वीर भी नहीं देंगे। इस पर श्रोताओं ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ कवि चौबे का धन्यवाद दिया। इसी बीच मालपुरा से पधारे कवि कौशलेन्द्र ने भी अपने देशभक्ति से ओत-प्रोत काव्य पाठों से श्रोताओं को मंच के सामने बांधा रखा, और पाकिस्तान की जमकर खिंचाई करते हुए मौजूद श्रोताओं की तालियां बटौरी।

इसी बीच सेना के जवानों ने हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए, दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए गीत पर कार्यक्रम स्थल पर मौजूद श्रोताओं को भक्ति रस में डूबने पर विवश कर दिया। कार्यक्रम के दौरान एबीवीपी के मौजूद पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरूआत से लेकर अंत तक मौजूद श्रोताओं ने भारत माता की जय, शहीद जवान अमर रहे, हिन्दुस्तान जिंदाबाद आदि नारे लगाये। कार्यक्रम का अंत सेना के जवानों द्वारा प्रस्तुत बहुत ही भावुक गीत हे प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं से किया गया। इस पर सभी श्रोतागण भावुक होकर गीत गुनगुनाने हुए दिखे। मंच संचालन कवि हेमंत चौबे और एबीवीपी के हरकरण जाट ने किया।

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