संथारे के 52वें दिन साध्वी उमरावकंवर का देवलोकगमन

  • Devendra
  • 28/03/2019
  • Comments Off on संथारे के 52वें दिन साध्वी उमरावकंवर का देवलोकगमन

महाप्रयाण यात्रा में शामिल हुए हजारों की संख्या में श्रावक-श्राविकाएं
बिजयनगर। स्थानीय स्वाध्याय भवन में साध्वी उमराव कंवर जी म.सा. का संथारा ग्रहण करने के 52वें दिन बुधवार प्रात: देवलोकगमन हो गया। म.सा. के देवलोकगमन के समाचार मिलते ही बिजयनगर-गुलाबपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के श्रावक-श्राविकाएं स्वाध्याय भवन पहुंचने लगे। इसके बाद म.सा. की महाप्रयाण यात्रा स्वाध्याय भवन से शुरू हुई जो बापू बाजार, महावीर बाजार एवं पीपली चौराहा होते हुए ब्यावर रोड स्थित श्री पीकेवी चिकित्सालय परिसर पहुंची, जहां हजारों श्रद्धालुओं के बीच साध्वी उमराव कंवर जी म.सा. की पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हुई। महाप्रयाण यात्रा के दौरान प्राज्ञ पब्लिक स्कूल के विद्यार्थी संथारा गीत ‘पन्ना की पावन जयवंती धरा फिर से मुखर हुई, नानक की कल्याण भूमि फिर से प्रखर हुई…’ गाते हुए चल रहे थे। इस दौरान श्रावकगण भी पूज्य प्रवर्तक दीन दयाल, धन्य-धन्य गुरु पन्नालाल के जयघोष लगा रहे थे।
4 फरवरी को ली थी दीक्षा
गत माह 4 फरवरी को नव दीक्षिता उमराव कंवर लुणावत ने संयम अंगीकार कर बिजयनगर में प्रवास कर रहे पूज्या गुरुवर्या कमलप्रभा जी म.सा. से दीक्षा ग्रहण की। गुरुवर्या ने करेमि भंते के पाठ से सम्पूर्ण पापों का त्याग करवाकर मुमुक्षु आत्मा को नवकार मंत्र के पंचम पद पर आरूढ़ किया। मुमुक्षु उमराव कंवर लुणावत का ‘साध्वी श्री उमराव कंवर जी म.सा.’ नामकरण हुआ। नामकरण की घोषणा के साथ स्थानक का प्रांगण जय-जयकारों से गूंज उठा। गुरुवर्या श्री ने नव दीक्षित साध्वी का केश लोचन किया। उनके स्वास्थ्य की नाजुक स्थिति देखते हुए उसी दिन मध्यान्ह बाद आचार्य प्रवर की स्वीकृति व सहमति से साध्वी श्री उमराव कंवर जी म.सा. को बड़ी दीक्षा प्रदान की गई।
कुछ माह से अस्वस्थ थीं
गत कुछ माह से उमराव कंवर लुणावत बीमार थी। परिजन उन्हें अहमदाबाद चिकित्सक को दिखाने ले गए। वहां उपचार के दौरान चिकित्सक ने लुणावत के परिजनों से उन्हें घर ले जाकर सेवा करने का संकेत दिया। जब यह बात उमराव बाई को पता चली तो उन्होंने परिजनों से बिजयनगर में गुरुवर्याश्री के सान्निध्य में संथारे की इच्छा जताई। धर्म के प्रति दृढ़ आस्था को देखते हुए अहमदाबाद में विराजमान संवर प्रेरक, ओजस्वी वक्ता प्रिदयदर्शन मुनि जी म.सा. ने लुणावत को सांसारिक जीवन से पूर्ण निवृत्ति दी। अहमदाबाद से बिजयनगर लुणावत को लाने के बाद 4 फरवरी को गुरुवर्या श्री के मुखारविन्द से लुणावत की दीक्षा सम्पन्न हुई। उस दिन भी चौविहार तप था, 5 फरवरी को दोपहर में गुरुवर्या श्री ने उनकी प्रबल भावना को ध्यान में रखते हुए संथारे का प्रत्याख्यान करवाया।

श्री उमरावकंवर जी म.सा. का सांसारिक जीवन परिचय
नाम : श्रीमती उमराव कंवर लुणावत
जन्म तिथि : 1 सितम्बर 1934, भादवा सुदी 3
जन्म स्थान : राताकोट
शिक्षा : कक्षा 6
आगम वाचनी : दशवैकालिक, उत्तराध्ययन, अंतगड़ सूत्र, नन्दी सूत्र, सुख-विपाक, कई थोकड़े, ढ़ाले, स्तवन आदि
शीलव्रत : 36 वर्ष की आयु में
तप : उपवास, बेला, तेला, अठ्ठाई, चौविहार, आयंबिल
वीर पिता : गजमल तातेड़
वीर माता : सोहनकंवर तातेड़
सास-ससुर : दाख कंवर-मोहनलाल लुणावत
पति : स्व. श्री नौरतमल लुणावत
ससुराल पक्ष : पारसमल- रतनलता,
महेन्द्र-प्रेमलता, सुरेन्द्र-अल्का, जिनेश-रेणु, राजेन्द्र-प्रमिला, नरेन्द्र-ममता लुणावत, बिजयनगर
पीहर पक्ष : किरणलता-सुगनचन्द, प्रेमलता-प्रेमचन्द, मंजू-ज्ञानचन्द, पद्मा-घेवरचन्द तातेड़, बिजयनगर
पुत्री : चन्द्रा सुराणा, लीना कोठारी, उर्मिला-मृगेश कोठारी
पुत्र-पुत्रवधु : सम्पतराज- निर्मलादेवी लुणावत
पौत्र-पौत्रवधु : अमित- सुनिता, विनीत-हीरल लुणावत
पौत्री-पौत्री जंवाई : रश्मि-अमित मेहता
पड़ दोहिता-दोहिती : विवान, अरवी
प्रपौत्री : केथी

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar