74 वर्षीय सूरजमल नाहर करेंगे देहदान

  • Devendra
  • 28/03/2019
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बिजयनगर: भाविप के दायित्व ग्रहण समारोह में की घोषणा
बिजयनगर। भारत विकास परिषद की ओर से गत दिवस आयोजित नवीन कार्यकारिणी का दायित्व ग्रहण समारोह ऐतिहासिक रहा। विभिन्न सामाजिक सरोकार से जुड़े इस संगठन के समारोह में सेवानिवृत राजकीय कर्मचारी सूरजमल नाहर (74) ने जब देहदान की घोषणा की तो वहां मौजूद लोगों ने तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया। समारोह में वर्ष 2019-21 की नवीन कार्यकारिणी में अध्यक्ष विनोद नाहर, सचिव सत्यनारायण जोशी व कोषाध्यक्ष ज्ञानचन्द नाहर को दायित्व ग्रहण कराया गया।

इस अवसर पर चैनराज खटोड़, डॉ. रमेश पारीक, विप्लवी माथुर, हेमचन्द रांका, पवन नाहर, लक्ष्मण शर्मा, महावीर प्रसाद टेलर, महावीर कूमठ, अमित चोरडिय़ा, आशीष बडौला, सुनिल बाबेल, सुनिल शर्मा, डॉ. नितिन दरगड़, हितेश मेवाड़ा, सुरेश कुमार शर्मा, श्यामलाल शर्मा, पारसमल रांका, महेन्द्रकुमार रायसिंघानी, बुद्धीप्रकाश पारीक आदि ने संस्था की सदस्यता ग्रहण कर सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर प्रांतीय महासचिव कैलाश अजमेरा, राष्ट्रीय मंत्री मध्य क्षेत्र मुकुन सिंह राठौड़, प्रांतीय अध्यक्ष दिनेश कोगटा, प्रांतीय संगठन मंत्री संदीप बाल्दी बतौर अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में निवर्तमान अध्यक्ष राजेश सोनी, सचिव सीए जितेन्द्र पीपाड़ा व कोषाध्यक्ष विनोद नाहर ने कार्यकाल में सभी के दिये गये सहयोग पर आभार ज्ञापित किया।

आत्मिक संतुष्टि के लिए, लोकप्रियता के लिए नहीं
समारोह में देहदान की घोषणा करने वाले सूरजमल नाहर के मुताबिक पांच वर्ष पूर्व ब्यावर निवासी उनके पूफा जौहरीलाल खींचा का निधन हो गया। उस समय उनके पुत्र व सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी निरंजनलाल खींचा ने पिता की देह को मेडिकल कॉलेज को देने का अनुकरणीय निर्णय लेकर रिश्तेदारों को चौंका दिया। तभी से मुझे भी मन में यह इच्छा जागृत हुई कि मैं भी कुछ ऐसा करूं कि मेरा शरीर किसी के काम आ सके। इस पर मैंने अंगदान करने का निर्णय लिया। इस सम्बंध में लोगों से पूछताछ करने पर बताया कि आप अंगदान जीते जी नहीं कर सकते, लेकिन देहदान का संकल्प पत्र जरूर भर सकते हैं।

इस पर मैंने अपना निर्णय बदल दिया और देहदान करने की ठान ली। इस कार्य में मेरे बचपन के मित्र और भारत विकास परिषद के पदाधिकारी रतनलाल नाहर ने भरपूर मदद की और मुझे देहदान का संकल्प पत्र उपलब्ध करा दिया। मैंने समस्त औपचारिकताएं पूरी कर हस्ताक्षर करने के बाद पुन: नाहर साहब को लौटा दिया। देहदान मैंने आत्मिक संतुष्टि के लिए किया है न कि किसी सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए। लेकिन मैं यह जरूर चाहूंगा कि कस्बे के अन्य लोगों को भी आगे आकर देहदान की घोषणा करनी चाहिए ताकि समाज में अच्छे चिकित्सक बन सकें।

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