महाप्रभावक विघ्रनिवारक उवसग्गीरं स्तोत्र का जाप सम्पन्न

  • Devendra
  • 24/11/2017
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बिजयनगर। श्रमणसंघीय महाश्रमणी श्री पुष्पवती जी म.सा. उपप्रवर्तिनी महासती श्री राजमती जी म.सा. आदि ठाणा-6 के पावन सानिध्य में महाप्रभावक विघ्रनिवारक उवसग्गीरं स्तोत्र का जाप हुआ। स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा भिनाय, बांदनवाड़ा, सतावडिय़ा, पाटन, अजमेर आदि क्षेत्रों से भी धर्मानुरागियों ने महासतीवृन्द के दर्शन, मंगलिक एवं जाप का लाभ लिया। महावीर भवन में उपप्रवर्तिनी श्रीराजमती जी म.सा. ने फरमाया कि इस स्त्रोत के माध्यम से जैन धर्म के तेइसवें तीर्थंकर प्रभु पार्श्वनाथ को नमन, वन्दन किया जाता हैं। वीतरागी आत्माओं का गुण स्मरण करने से कर्म क्षय होते हैं, आत्मशांति प्राप्त होती है। महामंगलकारी आत्मा के कल्याण हेतु शुद्ध भावों से जो इस स्त्रोत का स्मरण करता है उसके आधि, व्याधि, ग्रहपीड़ा आदि का निवारण होता है क्योंकि धर्म उत्कृष्ट मंगलकारी है। महापुरूषों की वाणी निश्चित ही निष्कृष्ट, पतित, पापी और दुष्ट से दुष्ट व्यक्ति को भी इंसान बनाने में समर्थ होती हैं।

संघ प्रवक्ता ने बताया कि महासती जी के प्रवास के दौरान ज्यादा से ज्यादा धर्म लाभ लेंवें। प्रवचन बड़ा स्थानक में जारी है। पूज्या महासती श्री वसुमति जी म.सा. आदि ठाणा स्वाध्याय भवन में विराजमान हैं।

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