जुगाड़ को वाहन माना, दुर्घटना पर मुआवजा देने के आदेश

जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में गांवाें में चलने वाले जुगाड़ को वाहन मानते हुए इससे हुई दुर्घटना के कारण मरने वाले के परिजनों को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार सीकर जिले में 29 जनवरी 2005 को गिरधारी नायक शाम को भढाडर से अपने गांव सांवलोदा आने के लिए अन्य सवारियों के साथ जुगाड़ में बैठा था जिसका उसने किराया अदा किया था। रास्ते में जुगाड़ पलटने से हुई दुर्घटना में सांवलोदा पुरोहितान निवासी गिरधारी की मौत हो गई।
गिरधारी की पत्नी संतारा देवी ने जुगाड़ मालिक कुम्भाराम जाट एवं जुगाड़ चलाने वाले उसके बेटे सुभाष जाट के खिलाफ मुआवजे का वाद दायर किया। इस मामले में सीकर के अपर जिला एवं सेशन न्यायालय फास्ट ट्रैक एवं मोटर वाहन दुर्घटना अधिकरण ने जुगाड़ को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन नहीं माना और वाद खारिज कर दिया।
अधीनस्थ अदालत के इस फैसले को संतारा देवी ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। सुनवाई के बाद न्यायाधीश बनवारी लाल शर्मा ने अपने फैसले में बताया कि जुगाड़ सवारियां ले जा रहा था इससे यह प्रकट होता है कि इसके इंजन की क्षमता पच्चीस क्यूबिक सेंटीमीटर से अधिक है और इसके गियर बॉक्स भी है। यह जुगाड़ पैसे लेकर सवारियां ढ़ो रहा था इसलिए यह जुगाड़ वाहन की श्रेणी में आता है।
अदालत ने माना कि भले ही इसका रजिस्ट्रेशन नहीं हो और चलाने वाले के पास लाइसेंस नहीं हो फिर भी प्रभावित परिवार मुआवजा पाने का हकदार है। अदालत ने कुम्भाराम जाट एवं उसके बेटे सुभाष को आठ सप्ताह में संतारा देवी को वाद दायर करने की तिथि से वूसली तक चार लाख चौरानवे हजार रुपये मुआवजा मय छह प्रतिशत ब्याज अदा करने के आदेश दिए हैं। आठ सप्ताह बाद भुगतान नहीं करने पर नौ प्रतिशत ब्याज के साथ राशि का भुगतान करना पड़ेगा।

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