राजस्थान में बागवानी फसलें लाएंगी खुशहाली

नई दिल्ली। राजस्थान सरकार ने राज्य में किसानों की अाय वर्ष 2022 तक दोगुना करने के उद्देश्य से फसल विविधीकरण योजना को प्रभावशाली ढंग से क्रियान्वित करना शुरू किया है और इसी तारतम्य में बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
पानी की कमी की समस्या से जूझ रहे इस राज्य में परम्परागत मक्का की खेती की जगह कम समय में हाेने वाली सब्जियों के उत्पादन पर अधिक जाेर दिया जा रहा है। इसके साथ ही बंजर जमीन पर खेती को भी बढ़ावा देने के प्रयास शुरू कर दिये गये हैं। राज्य में मिट्टी जांच, बीज उत्पादन में स्वावलंबन तथा सूक्ष्म सिंचाई याेजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कृषि विभाग की प्रधान सचिव नीलकमल दरबारी ने बताया कि सब्जियों के अलावा आम, अमरूद, शरीफा,नारंगी और खजूर के उत्पादन पर अधिक जोर दिया जा रहा है। राज्य की जलवायु खजूर की खेती के अनुकूल है और इसके लिए इजरायली प्राैद्योगिकी को अपनाया जा रहा है। राजस्थान में लगभग एक हजार हेक्टेयर में खजूर की खेती करने की योजना भी तैयार की गयी है। राजस्थान में वर्ष 2012-13 के दौरान बागवानी फसलों का उत्पादन 22 लाख 72 हजार टन था जो 2016-17 में बढ़कर 46 लाख 84 हजार टन हो गया था। बागवानी फसलों की वृद्धि 15 से 17 प्रतिशत की दर से हो रही है। शरीफा की अच्छी उत्पादकता को देखते हुए शरीफा उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना का भी निर्णय लिया गया है।

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