संविधान की भावना के अनुरूप ‘नया भारत’ बनाने का मोदी का आह्वान

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संविधान को लोकतंत्र की आत्मा बताते हुए देशवासियों से उसका अक्षरश: पालन करने और उसी की भावना के अनुरूप ‘नया भारत’ बनाने का आह्वान किया है ताकि समाज के गरीब, पिछड़े और वंचित समुदाय के लोगों के हितों की रक्षा की जा सके।
श्री मोदी ने आज यहां ‘मन की बात ’ के 38वें संस्करण में देशवासियों को संबोधित करते हुए यह आह्वान किया । उन्होंने कहा कि 1949 में आज ही के दिन संविधान-सभा ने भारत के संविधान को स्वीकार किया था और 26 जनवरी 1950 को यह लागू हुआ था ।
उन्होंने कहा कि संविधान हमारे लोकतंत्र की आत्मा है। हमारा यह कर्तव्य है कि हम संविधान का अक्षरशः पालन करें। नागरिक हों या प्रशासक,संविधान की भावना के अनुरूप आगे बढ़ें। किसी को किसी भी तरह से क्षति ना पहुँचे – यही संविधान का संदेश है। संविधान निर्माताओं के विचारों का प्रकाश में नया भारत बनाना ,हम सब का दायित्व है।
श्री मोदी ने कहा कि आज का दिन संविधान-सभा के सदस्यों के स्मरण करने का दिन है जिन्होंने इसे बनाने के लिए तीन वर्षाें तक कठोर परिश्रम किया था ।
श्री मोदी ने कहा कि हमारा संविधान बहुत व्यापक है। शायद जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, प्रकृति का कोई ऐसा विषय नहीं है जो उससे अछूता रह गया हो। सभी के लिए समानता और सभी के प्रति संवेदनशीलता, हमारे संविधान की पहचान है। यह हर नागरिक, ग़रीब हो या दलित, पिछड़ा हो या वंचित, आदिवासी हो या महिला सभी के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करता है और उनके हितों को सुरक्षित रखता है।

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