खुली जेलों से अपराधी को बेहतर नागरिक बनने में मिलती है मदद

जयपुर। खुली जेलों से अपराधियों को मानवीय वातावरण एवं सुधरने के बेहतर अवसर मिलने से उन्हें सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में आसानी तथा बेहतर नागरिक बनने में मदद मिलती है।
राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग द्वारा खुली जेलों के अध्ययन पर आधारित पुस्तक का आज यहां विमोचन करने के बाद यह अध्ययन करने वाली अपराध वैज्ञानिक शोधकर्ता स्मिता चक्रवर्ती ने मीडिया से यह बात कही। उन्होंने कहा कि अध्ययन में पाया कि इन जेलों में अपराधियों को मानवीय वातावरण देकर उन्हें सुधरने के बेहतर अवसर दिये जा सकते हैं। इससे वे सजा की समाप्ति के बाद समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकते हैं। इन जेलों में कैदी आत्मनिर्भर रहकर अपने परिवार का भी पालन कर पाते हैं। इससे उनका मनोबल तो बढ़ता ही है साथ ही वे एक बेहतर नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
उन्होंने बताया कि अध्ययन के मुताबिक बंद जेल की तुलना में खुली जेल में रहने वाले कैदी पर औसतन 78 प्रतिशत कम खर्च होता है। उन्होंने कहा कि खुली जेलों की अवधारणा काफी हद तक सफल है, इसलिये इसे बढ़ावा दिया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि हर जिले में कम से कम दो खुली जेल होनी चाहिये, इससे अपराधियों में सुधार के अवसर बढ़ेंगे और राजकोष पर भी भार कम होगा।
उन्होंने बताया कि राजस्थान में 1955 में ही खुली जेल की स्थापना की गई थी। उन्होंने कहा कि जयपुर में सांगानेर स्थित खुली जेल देश की सबसे बड़ी और बेहतरीन खुली जेल है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन रिपोर्ट खुली जेल की अवधारणा को पूरे देश में लागू करने में उपयोगी साबित हो सकती है।
इस अवसर पर राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव जस्टिस एस के जैन ने कहा कि खुली जेल की अवधारणा अपराधियों के लिए सुधारात्मक उपायों की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। उच्चत्तम न्यायालय ने भी खुली जेलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिये हैं। इसे देखते हुए राजस्थान में भी खुली जेलों एवं पारम्परिक जेलों में अंतर पर विस्तृत अध्ययन कराया गया है, जिसके आधार पर खुली जेल की अवधारणा को और सुदृढ़ किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि राज्य में खुली जेलों के अध्ययन पर आधारित यह रिपोर्ट उच्चत्तम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar