लश्कर के आठ आतंकवादियों के खिलाफ फैसला आज

जयपुर। राजस्थान और पंजाब की जेलों में बंद प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा को बढ़ाने और काम करने के आरोपी आठ कैदियों पर एडीजे कोर्ट संख्या 17 आज अपना फैसला सुनायेगी।
न्यायिक सूत्रों ने बताया कि राजस्थान की बीकानेर जेल में बन्द कैदी असगर अली को पाकिस्तान में बैठे लश्कर ए तैयबा के चीफ कमाण्डर विक्की उर्फ वलीद भाई से भारत में संगठन को फैलाने का निर्देश मिला था। करीब सात साल पहले बीकानेर जेल में बाबू उर्फ निशाचन्द और पवन पुरी नामक दो कैदियों को असगर अली ने अपनी बातों में फंसा लिया और अपने ग्रुप में शामिल कर लिया। बाबू बाद में जेल से छूट गया और पवन पुरी जेल तोड़कर फरार हो गया।
दोनों की असगर ने वली मोहम्मद से बात करवाई और धन भी उपलब्ध कराया। इन दोनों ने नागौर के अरुण जैन को भी अपने गिरोह में शामिल कर लिया। इन चारों की बातों पर एसओजी पूरी नजर रखे हुए थी।
उधर पंजाब में भी पटियाला जेल में बन्द आतंकवादी शकरुल्लाह और मोहम्मद इकबाल ने वली मोहम्मद के निर्देश पर पंजाब में इस संगठन को फैलाने का काम किया। इन दोनों ने जेल में काबिल खां को अपने जाल में फंसा लिया। काबिल जेल से छूटा तो उसने एक शिक्षण संस्थान में नौकरी कर ली। बाद में इसी शिक्षण संस्थान के शिक्षक हाफिज अब्दुल मजीद को आतंकवादी गतिविधियां फैलाने के लिए तैयार कर लिया।
इन आठ लोगों की बातों को एसओजी ने रिकॉर्ड पर ले लिया और तीस अक्टूबर 2010 को एफआईआर दर्ज कर चार लोगों को बीकानेर और पंजाब की जेलों से प्रॉडक्शन वारंट पर जयपुर ले आई। चार लोगों को पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे मामले की जांच एटीएस को सौंपी गई। एटीएस ने मामले की जांच के बाद लगभग तीन हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी।

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