मैं फिर से, बिजयनगर बोल रहा हूं

  • Devendra
  • 15/08/2019
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स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन पर सभी रहवासी को कोटि-कोटि बधाई। सीएलजी बैठक में किसी सदस्य ने मेरे दु:खती रग पर हाथ रख दी तो मानो जख्म हरा हो गया। पहले भी आपसे अपनी बात कही थी। जख्म हरा हो गया तो मैं फिर से बिजयनगर बोल रहा हूं। ध्यान से सुनिए। एक बदहाल और अव्यवस्थित शहर की पीड़ा क्या होती है।

मैं फिर से बिजयनगर बोल रहा हूं। मैंने ट्रेन की पटरियों पर कोयले की इंजन से लेकर डीजल देख चुका हूं। अब इलेक्ट्रीक इंजन भी सरपट भागते देखूंगा। बिजयनगर को अपने आगोश में फलते-फूलते देखा है। मिलों को खुलते व बंद होते हुए देख चुका हूं। पटरी पार आबादी बसते हुए देख रहा हूं और वहां की पीड़ा और भेदभाव भी महसूस कर रहा हूं। कभी व्यवस्थित शहरों में शुमार अब अव्यवस्थाओं का दंश झेल रहा हूं। नगर पालिका का नया बोर्ड बनने के बाद स्मार्ट सिटी का ख्वाब दिखाया गया तो फूले नहीं समा रहा था। लगता था सब को बता दूं। अब वो ख्वाब टूट गया। ‘वाह-वाह’ की चाहत थी लेकिन ‘आह’ निकल रहा है। चर्चा तो मेरे संस्थापक विजयसिंह राव की प्रतिमा लगाने की भी हुई, प्रस्ताव भी पास हो गया, लेकिन प्रतिमा तो दूर, चबूतरा तक नहीं बना। शायद यही मेरी नियति है। पीड़ा तो बहुत है, पर किसे कहूं। सुन रहे हैं आप। मैं फिर से, बिजयनगर बोल रहा हूं।

धन्यवाद, दौलतराम माणकचंदानी और थानाधिकारी विजयसिंह रावत जी कि आपने मेरा जख्म हरा कर दिया और ‘उनको’ आईना दिखा दिया। मैं भी गुलाबपुरा से लौट कर मेरे आगोश में आने वाले अपने लोगों की पीड़ा महसूस कर रहा हूं मैं गवाह हूं यहां के लोगों की उस पीड़ा का जब वह नगर पालिका में फरियाद लेकर जाते हैं। … और यह भी देखता हूं कि किस तरह आश्वासन देकर उन्हें टरकाया जाता है। बेशर्म आंखों में हया नहीं होती, नगर पालिका की बेजुबान दीवारें भी चश्मदीद है साहब।
… आप सुन रहे हैं न। मैं फिर से बिजयनगर बोल रहा हूं। मुझे शहर की बदहाल सड़कों और अंधेरी गलियों में लोगों की फिक्र है। शहर की सिसकती व सिकुड़ती सड़कों पर जिम्मेदारों की बेशर्म ठहाके देखता हूं तो शूल की तरह चुभने लगता है। बहुत पीड़ा होती है, … और फेहरिश्त भी लम्बी है। अंत में एक सलाह सभी बहनों को कि शहर की सड़कों पर बहुत गड्ढे हैं, संभल कर जाना राखी बांधने अपने भाईयों के पास। चलो, फिर कभी। आज स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाएं और रक्षा बंधन की खुशियां।

जय एस. चौहान

जय हिन्द, जय भारत

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