हमें अपने अराध्य के प्रति सर्वाधिक प्रेम होना चाहिए: संत अर्जुनराम

  • Devendra
  • 14/08/2019
  • Comments Off on हमें अपने अराध्य के प्रति सर्वाधिक प्रेम होना चाहिए: संत अर्जुनराम

गुलाबपुरा। रामस्नेही संत श्री अर्जुन राम जी महाराज ने अपने चातुर्मास प्रवास के दौरान सार्वजनिक धर्मशाला गुलाबपुरा में शिव पुराण कथा वाचन करते हुए अपने भक्तों को बारह ज्योतिर्लिंगों में से शेष रहे दो ज्योतिर्लिंग के बारे में व्याख्या करते हुए उनकी स्थापना के विषय में विस्तृत रूप से बताया जिसमें रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग व घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में समझाया। रामेश्वरम की स्थापना राम के द्वारा ही लंका विजय के पूर्व की गई अत: इसका महत्व सर्वाधिक बढ़ जाता है। महत्वपूर्ण कार्य को हम आवश्यक समझकर पहले करते हैं उसी प्रकार भगवान की पूजा को भी हमें महत्वपूर्ण समझ कर प्राथमिकता देते हुए प्रथमत: करना चाहिए।

भगवान को अपने मकान में रमणीय स्थान पर बैठाना चाहिए यथासंभव भगवान की पूजा का स्थान ईशान कोण में ही श्रेष्ठ माना गया हैं। सब की एकता बनाए रखने के लिए मंदिर बनाए जाते हैं। भगवान राम ने कहा शिव ही मुझे सबसे प्रिय है। शिव की पूजा के बिना मेरी पूजा अधूरी हैं। भगवान शिव के सामने राम नाम जाप करने से भगवान शिव अति प्रसन्न होते हैं। अपने आराध्य के प्रति सर्वाधिक प्रेम होना चाहिए। शिव की भक्ति से ही राम की भक्ति प्राप्त होती है शिव कृपा के बिना राम की भक्ति संभव नहीं है। भगवान शिव व राम दोनों एक दूसरे के पूरक हैं इसलिए दोनों की भक्ति करनी चाहिए राम के ईश्वर होने के नाते रामेश्वर कहलाते हैं जो मनुष्य रामेश्वरम का दर्शन करेगा वह शरीर छोडऩे पर मेरे धाम को प्राप्त होगा। रामेश्वरम में गंगा का जल चढ़ाने से सायोज्य मुक्ति को प्राप्त होते हैं। निष्काम भाव से जो शिवजी को भजेगा, उसे भक्ति प्राप्त होगी। कथा में मित्र मण्डल चातुर्मास समिति के सदस्य यज्ञदत्त नागर, नन्दकिशोर काबरा, कृष्ण गोपाल कोगटा, सत्यनारायण जागेटिया व अरविंद सोमानी इत्यादि उपस्थित थे।

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar