फिर जगी आस

आम जनता भी सहयोगात्मक रुख अपनाए तो कोई कारण नहीं दिखता कि चम्बल परियोजना के तहत लोगों के घरों तक पानी पहुंचने में देरी हो।

– जय एस. चौहान –

भीलवाड़ा निवासियों की तरह जल्द ही गुलाबपुरा, हुरड़ा के लोगों की प्यास चम्बल बुझाएगी। अड़चन के बाद एकबार फिर उम्मीद जगी है। दरअसल, चम्बल परियोजना के तहत गुलाबपुरा, हुरड़ा और बनेड़ा में पाइप लाइन डालने वाली फर्म का ठेका निरस्त कर सरकार ने निविदाएं निकाली है। निविदाओं के टेंडर आज खुलेंगी। उम्मीद है कि सरकार इस परियोजना के तहत जल्द से जल्द काम शुरू कर इन क्षेत्रों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए मुकम्मल और स्थाई प्रबंध करेगी।

फिलहाल, गुलाबपुरा, हुरड़ा में तीन से सात दिनों के अंतराल में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। गुलाबपुरा की कुछ कॉलोनियों में चार तो कुछ कॉलोनियों में सात दिन के अंतराल पर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में लोगों को सात दिन के लिए पानी का इंतजाम करना पड़ता है। गर्मी के दिनों में हालात और भी विकट हो जाते हैं। लोगों को टैंकरों से पानी डलवाना पड़ता है। गर्मी की आहट शुरू होते ही लोग हलकान हो जाते हैं। हालांकि गुलाबपुरा नगर पालिका की ओर से आम जनता को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सराहनीय

पहल की गई थी। इसके बावजूद स्थाई समाधान के लिए की जरूरत महसूस की जा रही थी।

राज्य सरकार की चम्बल परियोजना क्षेत्र में पेयजल की समस्या का स्थाई समाधान लेकर आएगी। ऐसा उम्मीद करना बेमानी नहीं है। जरूरत इस बात की है कि इस पर त्वरित गति से कार्य हो। पारदर्शिता बरती जाए और आम लोगों की जरूरत के हिसाब से योजना को अमलीजामा पहनाया जाए। तभी चम्बल परियोजना का परिणाम बेहतर से बेहतर हो सकेगा। इस परियोजना मूर्तरूप तक ले जाने के लिए आम जनता की सहभागिता भी कम अपेक्षित नहीं है। आम जनता भी सहयोगात्मक रुख अपनाए तो कोई कारण नहीं दिखता कि चम्बल परियोजना के तहत लोगों के घरों तक पानी पहुंचने में देरी हो। अपेक्षा है कि परियोजना को मूर्तरूप देने में अनावश्यक देरी को दरकिनार किया जाए।

उम्मीद है कि चम्बल परियोजना के तहत गुलाबपुरा, हुरड़ा के घरों में तय समय पर चम्बल नदी का पानी जल्द से जल्द पहुंंच जाएगा।

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