अस्पताल को सुधार की दरकार

राजकीय चिकित्सालय बिजयनगर का हाल
बिजयनगर। (दिनेश ढ़ाबरिया) बिजयनगर स्थित राजकीय चिकित्सालय में हर महीने औसतन 10 हजार से अधिक मरीज पहुंचते हैं। करीब डेढ़ लाख की आबादी पर यही एक मात्र सरकारी मुख्य अस्पताल है। इस अस्पताल में नेत्र रोग के चिकित्सक नहीं हैं। इसी तरह तकनीशियन और रेडियोग्राफर के कई पद रिक्त हैं। इसी तरह नर्सिंगकर्मियों का भारी टोटा है। ऐसे में इमरजेंसी केस में मरीज और तीमारदार की ही नहीं सभी की सांसें अटक जाती हैं। दरअसल, यहां अस्पताल की व्यवस्था में सुधार की दरकार है…

जिले में लोकसभा उपचुनाव सिर पर होने के बावजूद भाजपा शासित राज्य सरकार स्थानीय राजकीय चिकित्सालय को लेकर संवेदनशीलता नहीं बरत रही और इसका खमियाजा यहां के मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। बिजयनगर सहित आस-पास के गांवों की करीब डेढ़ लाख की आबादी के लिए प्रमुख चिकित्सा केन्द्र बिजयनगर का राजकीय चिकित्सालय ही है। इन दिनों चिकित्सकों व स्टॉफ की भारी किल्लत झेल रहे इस चिकित्सालय में उपचार के लिए राहत की आस में आने वाले मरीज यहां की सेवाओं से आहत हो रहे हैं। इसके बावजूद कांग्रेस और भाजपा के जनप्रतिनिधि अस्पताल की दुर्दशा पर मौन हैं। हालात यह है कि 75 बेड के इस अस्पताल में पुरुष वार्ड, महिला वार्ड, गायनिक वार्ड, शिशु वार्ड सहित चारों वार्डों में रात्रि के समय मात्र दो नर्सिंग कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया जाता है। इसमें भी कोढ़ में खाज यह है कि कई बार अस्पताल रात्रि समय एक नर्सिंग स्टॉफ के भरोसे ही रहता है। इन हालात में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि रात्रि में आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों और घायलों को चिकित्सा सेवा देने में कितनी तत्परता बरती जाती होगी।

75 शायिकाओं वाले स्थानीय राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों के स्वीकृत 10 पदों में भी सरकार के फरमान ने समस्या बढ़ा दी है। इनमें से दो चिकित्सकों को प्रतिनियुक्ति पर अन्यत्र भेज दिया गया है, वहीं एक पद को भरा ही नहीं गया।

अस्पताल को सुधार…
अस्पताल में सर्जन डॉ. ए.पी. माथुर को सेवानिवृत्त हुए अरसा हो चुका है लेकिन उनकी जगह आज तक किसी अन्य सर्जन की नियुक्ति यहां नहीं की गई। जबकि शहर से होकर गुजर रहे अजमेर-भीलवाड़ा राजमार्ग पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ऐसे में घायलों को उपचार के लिए यहां सर्जन का होना बेहद जरूरी है। ऐसे हालात में यहां नियुक्त चिकित्सकों के पास दुर्घटनाओं में घायल होकर आने वाले मरीजों को अजमेर व भीलवाड़ा रेफर करने के बजाय कोई विकल्प नहीं रहता।

नर्सिंग कर्मियों का टोटा
अस्पताल में नर्सिंगकर्मियों के कुल स्वीकृत 12 में से तीन पद रिक्त हैं। कुछ समय पूर्व समानीकरण की नीति के तहत राज्य सरकार ने यहां नियुक्त 5  नर्सिंग कर्मचारियों का तबादला अन्यत्र कर दिया।  इसके चलते अस्पताल के नर्सिंगकर्मियों पर काम का अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है।

नेत्र रोग विशेषज्ञ नहीं
राजकीय चिकित्सालय में नेत्र रोग विशेषज्ञ पद स्वीकृत होने के बावजूद यहां काफी समय से रिक्त है। बीच में कुछ समय के लिए राजकीय चिकित्सालय नसीराबाद के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. भाटी सप्ताह में तीन दिन स्थानीय  चिकित्सालय में अपनी सेवाएं दे रहे थे, लेकिन नसीराबाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद उनकी यहां की सेवाएं भी हटा दी गई। इससे नेत्र रोग पीडि़तों को उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है।

जांचें हो रही प्रभावित
अस्पताल की प्रयोगशाला की स्थिति बेहद नाजुक है। प्रयोगशाला में तीन तकनीशियन के पद स्वीकृत है लेकिन वर्तमान में दो पदों के रिक्त होने के कारण एक तकनीशियन के भरोसे अस्पताल की प्रयोगशाला चल रही है। ऐसे में विभिन्न रोगों से पीडि़त रोगियों की विभिन्न तरह की जांचों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कई जांचें एकमात्र कर्मचारी के कारण फिलहाल हो ही नहीं रही।

रेडियोग्राफर भी नहीं
स्थानीय चिकित्सालय में रेडियोग्राफर के स्वीकृत चार पदों में तीन पद रिक्त हैं।

इमरजेंसी केस में होती है परेशानी
अस्पताल में सर्जन, नेत्र रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित नर्सिंग स्टॉफ की बहुत ज्यादा कमी है। रोजाना 400  के लगभग की ओपीडी होती है और सीजन में यही ओपीडी 600  तक चली जाती है। नर्सिंग स्टाफ की कमी की से इमरजेंसी केस में भारी दिककतों का सामना करना पड़ता है। जब कभी एक ही नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी पर हो और वह लेबररूम में हो, उसी समय कोई इमरजेंसी केस आ जाए तो स्थिति सम्भालना मुश्किल हो जाता है। रिक्त पदों को भरने को लेकर सीएमएचओ और निदेशक को कई बार पत्र प्रेषित किए जा चुके हैं।

डॉ. प्रदीप गर्ग, कार्यकारी चिकित्सा प्रभारी, राजकीय चिकित्सालय, बिजयनगर

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