फर्जी शिक्षा बोर्ड का भंडाफोड़, छह गिरफ्तार

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने फर्जी शिक्षा बोर्ड चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए इसके सरगना और बोर्ड के अध्यक्ष समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है।

दिल्ली पुलिस के पूर्वी रेंज के संयुक्त आयुक्त रविन्द्र यादव ने आज यहां पुलिस मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि यह गिरोह छह सात वर्षों से सक्रिय था। इस मामले 2011 में शाहदरा जिले के गीता कालोनी पुलिस स्टेशन शिकायत मिली थी जिसमें शिकायतकर्ता ने कहा था कि उसे एक आदमी ने पैसे लेकर फ़र्ज़ी डिग्री दे दी है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते जांच शुरू की तो एक के बाद एक कड़ी सुलझती गई।

इस मामले में पुलिस ने दो लोगों को शाहदरा से, तीन को विकासपुरी तथा इसके अध्यक्ष शिव प्रसाद पांडेय (65) को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पांच अन्य लोगों की पहचान प्रशांत सोलंकी (22), बलजीत सिंह उर्फ राजू (24), अल्ताफ राजा (22), लक्ष्य राठौर उर्फ अमित (24), रामदेव शर्मा (65) के रूप में हुई है।

यादव ने कहा कि यह गिरोह बोर्ड आॅफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन के नाम से छोटे छोटे शहरों अखबारों में इश्तेहार निकालकर दसवीं, बारहवीं और बीए कराने के नाम पर लोगों को अपनी जाल में फांसता था। उन्होंने कहा कि इसके अलावा इस बोर्ड के माध्यम से स्कूलों को मान्यता भी देता था। इसके बदले में बिहार और उत्तर प्रदेश में पांच हजार से 20 हजार वसूलता था जबकि पंजाब और राजस्थान में डेढ़ से दो करोड़ वसूलता था।

संयुक्त आयुक्त ने कहा कि इनके पास से 17 शिक्षा बोर्ड के 17 हजार से अधिक सर्टिफिकेट और डिग्रियां मिली है। इसके अलावा 55 रबर स्टांप, प्रिंटर, कंप्यूटर तथा अन्य सामान जब्त किया गया है।

पुलिस पूछताछ में पांडेय ने दावा किया कि सिर्फ लखनऊ में पांच हजार से अधिक लोगों ने इस बोर्ड की डिग्रियों का पासपोर्ट बनाने में इस्तेमाल किया है। इसके साथ देश के अलग अलग हिस्सों इनकी तरफ से जारी डिग्री के आधार पर नौकरी भी कर रहे हैं।

इसकी वेबसाइट पर दावा किया गया है कि इसे मानव संसाधन मंत्रालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और शिक्षा परिषद (एनसीईआरटी) तथा कई अन्य राज्यों के शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। इसके अलावा यह भी दावा किया गया है कि यह शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तहत एक स्वायत्त संस्था है।

यादव ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते इसके विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है कि इस बोर्ड के माध्यम से कितने लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं। पूरे देश में इस गिरोह का नेटवर्क था।

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