हिंसा से कोई समाधान नहीं होता: नायडु

  • Devendra
  • 16/12/2019
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नई दिल्ली। (वार्ता) उप राष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडु ने छात्र संघों और मजदूर संघों से विवादों और समस्याओं का बातचीत से समाधान करने का अाग्रह करते हुए सोमवार को कहा कि सार्वजनिक संपदा का नुकसान करने से राष्ट्र की हानि होती है।

श्री नायडु ने यहां राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (खान) 2015-16 प्रदान करने के बाद उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है। लोगों को अपने विरोध के तरीके काे शांतिपूर्ण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र संघों और मजदूर संघों को विरोध करते समय इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होेंने कहा, “सार्वजनिक संपदा को नुकसान पहुंचाना राष्ट्र को नुकसान पहुंचाना है।” उप राष्ट्रपति ने कार्यस्थलों पर सभी श्रमिकों की संरक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा कि एक स्वस्थ श्रमिक उत्पादन में बेहतर योगदान कर सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में बढोतरी होती है। उन्होंने कहा कि मजदूरों को सुरक्षा उपलब्ध कराना नियाेक्ताओं का कर्तव्य है तो श्रमिकों को उत्पादन बढ़ाने में सहयोग करना जरुरी है। दोनों के कर्तव्य पालन करने से ही राष्ट्र आगे बढ़ेगा और सशक्त बनेगा। उद्याेग का लक्ष्य ‘स्वस्थ मजदूरों के साथ राष्ट्रीय संपदा का निर्माण’ होना चाहिए।

दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में लगी से आग में मारे गए श्रमिकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें निगरानी का अभाव रहा है। उद्याेगों को बचाव की संस्कृति विकसित करनी चाहिए जिससे दुर्घटना नहीं हो और मजदूर निश्चित होकर काम कर सके। समारोह में 73 नियोक्ता कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (खान) प्रदान किये गये। इस अवसर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष कुमार गंगावार, मंत्रालय में सचिव हीरालाल सामरिया और संयुक्त सचिव कल्पना राजसिंहोट मौजूद थे। उप राष्ट्रपति ने निगरानी और निरीक्षण के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करने पर जाेर दिया और कहा कि उद्योगों को कार्यस्थलों पर ‘कोई खतरा नहीं’ की नीति अपनानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस नीति के दायरे में न केवल मनुष्य आने चाहिए बल्कि पर्यावरण को भी इसका हिस्सा होना चाहिए।

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