आरटीआई ब्लैकमेल करने का धंधा बन गया है: सुप्रीम कोर्ट

  • Devendra
  • 16/12/2019
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नई दिल्ली। (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने सूचना आयोगों में खाली पड़े पदों को भरने संबंधी मामलों पर सुनवाई करते वक्त सोमवार को एक तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून डराने-धमकाने और ब्लैकमेलिंग का जरिया बन गया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को सूचना आयोगों में तीन महीने के भीतर सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करने का आदेश भी दिया। मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि तीन महीने की अवधि आज से ही शुरू होगी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि आरटीआई कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए दिशानिर्देश बनाने की जरूरत है।

न्यायमूर्ति बोबडे ने सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करतेे हुए कहा, “क्या आरटीआई कार्यकर्ता होना पेशा हो सकता है? जिन लोगों को किसी विषय से कोई सरोकार नहीं है वे भी जानकारी मांगने के लिए आरटीआई दाखिल कर रहे हैं, जबकि इस कानून के पीछे का उद्देश्य लोगों को उन सूचनाओं को बाहर निकालने की अनुमति देना था, जो उन्हें प्रभावित करती हैं। अब सभी प्रकार के लोग सभी प्रकार के आरटीआई आवेदन दाखिल कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “आजकल लेटरहेड पर आरटीआई कार्यकर्ता होने का दावा करते हुए नाम छपवाते हैं। जो लोग इस मामले से जुड़े नहीं हैं वे आरटीआई आवेदन दाखिल कर रहे हैं। यह एक गंभीर बात है। यह मूल रूप से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी है।” शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी केंद्र और राज्य सूचना आयोगों में सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों को भरने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज की याचिका पर सुनवाई के दौरान आयी।

उल्लेखनीय है न्यायालय के बार-बार कहने के बाद ही केंद्र सरकार ने इस साल मार्च के अंत में लोकपाल की नियुक्ति की थी। नियुक्ति के बाद हालांकि अभी तक लोकपाल को स्थायी कार्यालय तक मुहैया नहीं कराया गया है। खंडपीठ ने सुश्री भारद्वाज की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की इस बात को गंभीरता से लिया कि शीर्ष अदालत के 15 फरवरी 2019 के फैसले के बावजूद केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में अभी तक अनेक सूचना आयुक्तों की नियुक्ति नहीं हुई है। खंडपीठ ने केंद्र सरकार के अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया कि सरकार की वेबसाइट पर वे दो हफ्ते के भीतर सर्च कमेटी के सदस्यों के नाम डालें। सर्च कमेटी को ही केंद्रीय सूचना आयोग के आयुक्तों का चयन करना है। सरकार ने न्यायालय को बताया कि 14 दिसंबर को सर्च कमेटी का गठन किया गया है।

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