बारिश और ओलावृष्टि के बाद मौसम ने ली करवट

  • Devendra
  • 19/12/2019
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क्षेत्र में इन दिनों कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। हालांकि इसे सेहत का मौसम भी कहा जाता है, लेकिन परहेज भी जरूरी है। आपकी थोड़ी सी लापरवाही सर्दी की चपेट में ला सकती है। ऐसे में चिकित्सकों की सलाह को कतई दरकिनार मत करिए। हालांकि फसलों के लिए यह मौसम फायदेमंद है लेकिन सेहत के लिए सावधानी ही बेहतर उपाय है। कहावत भी है जान है तो जहान है। खारीतट संदेश की यह विशेष रिपोर्ट….
बिजयनगर। देश के उत्तरी पहाड़ी इलाकों में कई दिनों से लागातार हो रही बर्फबारी एवं राज्य में हुई ओलावृष्टि व बारिश के बाद मौसम ने अचानक करवट बदली है। इससे जहां दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है तो वहीं एकाएक रात का तापमान भी तेजी से गिरा है। इससे सुबह शाम लोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे हैं। वहीं बाजारों व गली -मोहल्लों में लोग अलाव तपते नजर आ रहे हैं। गत दिवस अलसुबह छाए घने कोहरे के चलते आमजन खासा प्रभावित रहा। इससे दोपहर तक सूर्य देव के दर्शन तक नहीं हुए। इसके चलते मौसम में खासी ठण्डक महसूस की गई। वहीं शाम 5 बजे तक वापस हवा में ठण्डक घुली और धीरे-धीरे बाजार में सूनापन पसरने लगा। अचानक मौसम में हुए बदलाव से जहां बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं चाय, नाश्ते वाले के यहां खासी भीड़ उमड पड़ी। सर्द मौसम में हर कोई चाय की चुस्की, आलू बड़े, गर्म दूध, कचौरी और समौसे आदि का लुत्फ लेते नजर आए। ग्राहकों की खासी भीड़ को देखकर दुकानदार भी उत्साहित दिखे।

मानिए डाक्टर की सलाह, सुबह-शाम बच्चों को घर से नहीं निकलने दें
डॉ. अजय शर्मा ने बताया कि बच्चों को सुबह-शाम घर से बाहर नहीं निकलने दें। खासकर नवजात बच्चों को पूरे दिनभर गर्म कपड़ों में रखे। बच्चों को दिन के समय यदि धूप ठीक-ठाक हो तभी खुले में खेलने दें। बच्चों को ठण्डा खाना कतई न खिलाएं। किसी भी प्रकार की तकलीफ होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें। यदि घर में किसी बच्चे को बुखार, खांसी या जुकाम आदि हो रखा हो तो उसे स्कूल न भेजें और उसके छींकने या खांसने पर मुंह पर कपड़ा रखने की सलाह दें।
तेज सर्दी में मार्निंग वाक से भी करें परहेज
डॉ. राजेन्द्र चण्डक ने बताया कि मोर्निग वॉक पर जाने वाले लोगों को यदि सर्दी तेज हो तो परहेज करना चाहिए। विशेषकर श्वास की तकलीफ वालों को इन दिनों मॉर्निंग वाक नहीं करना चाहिए। गर्म कपड़ों से कवर्ड होकर ही घर से निकलें।
जरूर खाएं पिण्डखजूर व थोड़ा गुड़
डॉ. कल्पना अग्रवाल ने बताया कि गर्भस्थ महिलाओं को रोजाना 300-400 एमएल गुनगुना पानी पीना चाहिए। साथ ही गुनगुनी धूप में सरसों के तेल से मसाज करना चाहिए। गर्भस्थ महिलाओं को चाहिए कि रोजना हल्का-फुल्का व्यायाम करें। ऐसी महिलाओं को कतई व्यायाम नहीं करना चाहिए जिन्हें चिकित्सक ने बेड रेस्ट की सलाह दी हो। खाना दिन में तीन से चार बार करके खाना चाहिए। इन दिनों में पिंडखजूर, थोड़ा गुड़, मूंगफली, चने और पत्तेदार हरी सब्जियों का इस्तेमाल करना चाहिए। दिनभर में 500-600 एमएल दूध पीना चाहिए। वैसे गर्भस्थ महिला को मुंह को मास्क या रूमाल से ढ़का हुआ रखना चाहिए ताकि खांसी और जुकाम सहित अन्य बीमारियों से अपने आपको बचा सके। इन दिनों में गर्भस्थ महिला को रोजना 2-3 घंटे धूप में रहना चाहिए एवं कोहरा छाने की स्थिति में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। वहीं सर्दी के मौसम में भी रोजाना 2-3 लीटर पानी अवश्य पीना चाहिए।

इधर, किसान खुश: फसलों के लिए फायदेमंद
वर्तमान समय में ओस व सर्दी फसलों के लिए श्रेष्ठ मानी जा रही है। बगराई निवासी किसान दुर्गाशंकर चौधरी, जालिया के पोलूराम माली व सिंगावल के जगदीश ज्याणी एवं रामनाथ गुर्जर ने बताया कि गत दिनों हुई हल्की बूंदाबांदी व ओस से फसलों को फायदा पहुंचा है वहीं इन दिनों पड़ रही कड़ाके की सर्दी वर्तमान समय में बोई हुई फसलों के लिए वरदान हो रही है।
स्कूल में नौनिहालों को हुई परेशानी
कड़ाके की ठण्ड व गलन में जहां बुजुर्ग व युवा रजाईयों में दुबके रहते हैं वहीं विद्यालय जाने वाले नौनिहालों को खासी परेशानी हुई। अलसुबह छाए कोहरे के चलते जहां स्कूल बसे अपने निर्धारित समय से कुछ देर से चली इससे बच्चे बस स्टॉप पर कड़ाके की ठण्ड में बाल वाहिनी के इंतजार में ठिठुरते रहे। इससे कई विद्यार्थियों को सर्दी-जुकाम व बुखार की शिकायत होने लगी।
अजमेर जिले में बदला 8वीं तक की स्कूलों का समय
क्षेत्र में कड़ाके की ठण्ड को देखते हुए जिला कलक्टर विश्वमोहन शर्मा ने आदेश जारी कर जिले के सभी सरकारी, निजी व सीबीएसई बोर्ड से सम्बंध विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक का समय प्रात: 10 से अपरान्ह 4 बजे तक व कक्षा 9 से 12 तक का समय यथावत रखा है। वहीं एडीएम (सिटी) व उपखंड अधिकारी आदेश की पालना करायेंगे। हालांकि क्षेत्र में बुधवार को सर्द मौसम में अधिकांश स्कूलों के विद्यार्थी पूर्व निर्धारित समय पर ही विद्यालयों में पहुंचे।
घरों से आने लगी गोंद के लड्डुओं की महक
तापमान में अचानक गिरावट आने के साथ ही अधिकांश घरों से गोंद व मेथी के लड्डुओं के बनने की महक आने लगी है। घर की बुजुर्ग महिलाएं परिवार के सदस्यों के श्रेष्ठ स्वास्थ्य और मजबूत व सुडौल शरीर के लिए गोंद, मेथी सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाने में व्यस्त दिखी। एक ओर जहां वर्तमान दौर में बाजार में तमाम तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं लेकिन ये देशी दवाएं इन सब नवीनतम उत्पादों से श्रेष्ठ है। चाहे वो स्वाद में हो या फिर पौष्टिकता में हो। तेजा चौक निवासी रतनीबाई शर्मा ने खारीतट संदेश के साथ बातचीत में सर्दी के दिनों में गोंद व गोले से बने लड्डू खाने की सलाह दी। यह सेहत के लिए काफी अच्छा है।

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