लोकतंत्र के प्रति देशवासियों का विश्वास बढ़ा: बिड़ला

  • Devendra
  • 18/12/2019
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देहरादून। (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा है कि लोकतंत्र के प्रति देशवासियों में विश्वास बढ़ा है और 17वीं लोकसभा के चुनाव में 67.40 प्रतिशत मतदान हुआ। बुधवार को यहां आयोजित देश के विधायी निकायों के पीठासीन अधिकारियों एवं सचिवों के 79वें वार्षिक सम्मेलन काे संबोधित करते हुए श्री बिड़ला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। , जहां पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव होते हैं। उन्होंने कहा, “ हमारा प्रयास है कि संसदीय सत्र में सभी सदस्यगणों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका मिले। सत्रहवीं लोकसभा के गठन के बाद पहला सत्र 37 दिन तक चला, जिसमें 35 विधेयक पारित हुए। इस दौरान एक दिन भी संसद की कार्यवाही स्थगित नहीं हुई। ”

उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल और शून्यकाल में सदस्यों के अधिकतम प्रश्नों को रखने का मौका दिया तथा पहली बार निर्वाचित होने वाले सदस्यों को सदन में अधिक से अधिक बोलने के लिए आग्रह किया। लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि देहरादून में आयोजित इस सम्मेलन में लोकसभा और विधानसभा के सभी मन्दिरों को कैसे और अधिक मजबूत किया जा सकता है, इस पर व्यापक स्तर पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा, “ मुझे पूरा विश्वास है कि देवभूमि के अन्दर जो दो दिवसीय चर्चा होगी, इसके आने वाले समय में अनेक सकारात्मक परिणाम होंगे। हमारा प्रयास है कि लोकतंत्र के इन मंदिरों में सभी की जनता के प्रति जवाबदेही हो। विधानसभा सदन अधिक से अधिक चले इसके लिए भी इस सम्मेलन में चर्चा होगी। हमारा प्रयास होगा कि जो भी लक्ष्य निर्धारित करें, वह अवश्य पूर्ण हो।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सम्मेलन में सहभागिता कर रहे अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहला मौका है जब उत्तराखंड को इस तरह के आयोजन की मेजबानी हमारे लिए गर्व की बात है। एक स्वस्थ और मजबूत लोकतंत्र में आप जैसे लोगों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि सदन का अध्यक्ष एक अभिभावक की तरह होता है। सदन में सबको अधिकतम अवसर देना, सबकी सुनने का दायित्व होता है, इसके लिए विशेष कौशल की जरूरत होती है, जिसका सभी बड़ी कुशलता से निर्वहन कर रहे हैं। श्री रावत ने कहा, “ लोकतंत्र की मजबूती के लिए सबसे जरूरी है कि सदन सुचारु रूप से चलता रहे। सदन ही वो जगह है, जहां से देश को या राज्यों को चलाने के लिए गंभीर चर्चाएं होती हैं, कानून बनते हैं, सदन में ही जनता से जुड़े मुद्दे उठते हैं।

जिस तरह से संसद में अध्यक्षीय शोध कदम के तहत नए नए शोध और तकनीकों को बढ़ावा मिल रहा है, राज्यों की विधानसभाओं में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।” विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल ने कहा कि सम्मेलन में संविधान की दसवीं अनुसूची, शून्य काल सहित सभा के अन्य साधनों के माध्यम से संसदीय लोकतंत्र का सुदृढ़ीकरण, क्षमता तथा निर्माण आदि विषयों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में जो भी मंथन होगा, उसके भविष्य में बहुत अच्छे परिणाम मिलेंगे। इस अवसर पर सांसद अजय भट्ट, माला राज्यलक्ष्मी शाह, तीरथ सिंह रावत, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल, मेयर देहरादून सुनील उनियाल गामा, विभिन्न राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष, विधानपरिषदों के सभापति एवं उत्तराखण्ड के विधायक उपस्थित थे।

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