बेटियों का मनोबल बढ़ाना जरूरी

  • Devendra
  • 26/12/2019
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याद रखिए, बेटियां या यूं कहें कि मातृशक्ति का यह आत्मविश्वास व मनोबल दो परिवारों और दो समाजों के ही काम आएंगे। समृद्ध समाज और सशक्त राष्ट्र के लिए बेटियों के आत्मबल को बढ़ाना जरूरी है।
एक सवाल यक्षप्रश्न की तरह समाज में फैल रहा है। सवाल यह है कि समाज में सबसे असुरक्षित कौन है? ज्यादातर लोग इस बात से सहमत होंगे कि समाज में सबसे असुरक्षित हमारी बेटियां ही हैं। यह हालात देश भर में लगभग एक जैसा है। ऐसे हालात में बेटियों में आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाना जरूरी ही नहीं आवश्यक है। बिजयनगर में बेटियों को आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) के गुर सिखाने का बीड़ा हिन्दु युवा वाहिनी ने उठाया है।

वाहिनी के इस प्रयास की सराहना की जानी चाहिए। शिविर में पहुंच रही बेटियों का मनोबल भी बढ़ाना जरूरी है। आत्मरक्षा के गुर तो प्रशिक्षक सिखा ही देंगे लेकिन बेटियों का मनोबल परिजन व समाज के लोग ही बढ़ा सकते हैं। इसमें न तो समाज को और न ही अभिभावकों को कंजूसी बरतनी चाहिए। सात दिवसीय इस शिविर में आत्मरक्षा के गुर व बारीकियां प्रशिक्षक बखूबी पूरी तन्मयता से सिखा रहे हैं। बेटियां भी उसी तन्मयता व तत्परता से सीख रही हैं। इसमें किसी को किसी तरह का संदेह नहीं करना चाहिए। याद रखिए, बेटियां या यूं कहें कि मातृशक्ति का यह आत्मविश्वास व मनोबल दो परिवारों और दो समाजों के ही काम आएंगे।

समृद्ध समाज और सशक्त राष्ट्र के लिए बेटियों के आत्मबल को बढ़ाना जरूरी है। सबकुछ सरकार या फिर पुलिस पर नहीं छोड़ देना चाहिए। सरकार का अपना तरीका है और पुलिस की भूमिका अलग होती है। सरकार व पुलिस सर्वत्र नहीं होती लेकिन समाज व परिवार से बेटियों का रिश्ता तो जन्म-जन्मांतर का है। ऐसे में परिवार व समाज की जिम्मेदारी कहीं अधिक है। आइए, एक सशक्त समाज के लिए बेटियों का मनोबल बढ़ाएं। आत्मरक्षार्थ शिविर में बेटियों को जाने के लिए प्रेरित करें। अपने सामाजिक व पारिवारिक दायित्व का पूरी मुस्तैदी से निर्वहन करें। जय हिन्द।
दिनेश ढाबरिया

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