नया साल, नया संकल्प

निश्चित तौर गुलाबपुरा में जो वादे किए गए थे उनमें ज्यादातर पूरे हो चुके हैं लेकिन कई समस्याएं आज भी विद्यमान हैं। मसलन गुलाबपुरा में जलजमाव से निजात पाने के लिए स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है। वहीं बिजयनगर में जितने वादे किए गए थे उनमें पासंग बराबर ही पूरे हुए हैं ज्यादातर वादे आज भी अधरझूल में है।

वर्ष 2019 के विदा होते ही नववर्ष 2020 का आगाज हो चुका है। वर्ष 2019 की तरह ही यह नया साल भी बीत जाएगा। सदियों से ऐसा ही होता रहा है आगे भी यही होगा। वर्ष 2019 में केन्द्रीय सरकार के चुनाव हुए तो वहीं वर्ष 2020 में गांव व शहर की सरकार का चुनाव होगा। संभव है कि जनवरी-फरवरी में गांवों की सरकार का चुनाव अर्थात पंचायत राज चुनाव होगा। सियासी तौर पर गुणा-भाग, जोड़-तोड़ की रणनीति शुरू हो गई है। साल के आधा सफर तय करने के बाद शहर की सरकार के लिए (नगर पालिका) चुनाव होंगे। यही लोकतंत्र है। उम्मीद की जानी चाहिए कि खासकर, गुलाबपुरा व बिजयनगर में शहर की सरकार के लिए जनप्रतिनिधियों ने जो वादे किए थे उसे जल्द से जल्द पूरा करे। क्योंकि समय कम है और लोगों (मतदाताओं) की यादाश्त कमजोर नहीं है।

निश्चित तौर गुलाबपुरा में जो वादे किए गए थे उनमें ज्यादातर पूरे हो चुके हैं लेकिन कई समस्याएं आज भी विद्यमान हैं। मसलन गुलाबपुरा में जलजमाव से निजात पाने के लिए स्थाई समाधान नहीं निकाला गया है। वहीं बिजयनगर में जितने वादे किए गए थे उनमें पासंग बराबर ही पूरे हुए हैं बिजयनगर की जनता को आज भी स्मार्ट सिटी के वादे याद हैं लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर जो स्थिति है वो नगर के सामने हैं। ज्यादातर वादे आज भी अधरझूल में है। इस वर्ष अगस्त या फिर सितम्बर में नगर पालिकाओं के चुनाव होंगे। समय कम है और किए गए वादों की फेहरिश्त काफी लम्बी है। ऐसे में बिजयनगर इस वर्ष यानी 2020 में ट्वंटी-ट्वंटी की तरह ही ताबड़तोड़ वादों को पूरा करने के लिए कार्य करने होंगे। क्योंकि समय बेहद कम है।

इसी तरह नगर पालिका बिजयनगर प्रशासन को शहर में लगने वाले जाम, अतिक्रमण और आवारा मवेशियों से मुक्त करने के लिए कार्ययोजना बनाकर पूरी तन्मयता व ईमानदारी से कार्य करना चाहिए। क्योंकि एक बार फिर याद दिला दूं कि समय वाकई बहुत कम है। बिजयनगर व गुलाबपुरा में सरकारी कालेजों की काफी पुरानी मांगें आज भी पूरी नहीं हो सकी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस वर्ष दोनों शहरों के जिम्मेदार प्रतिनिधि इस मांग को पूरा करने के लिए भरसक प्रयास करेंगे। इसी तरह विधानसभा चुनाव के दौरान मसूदा विधायक ने बिजयनगर राजकीय चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी को दूर करने का वादा किया था लेकिन साल भर बाद भी समस्या जस की तस है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस वर्ष चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी को दूर कर दिया जाएगा।

अब बात दूसरी, दोनों शहरों के नागरिकों के लिए। दोनों शहर अपेक्षाकृत बहुत अधिक स्वच्छ नहीं है। ऐसे में लोगों को यह महसूस करना चाहिए कि यह सिर्फ नगर पालिका पालिका प्रशासन का दायित्व ही नहीं है बल्कि बेहतर नागरिक होने का परिचय देते हुए हर नागरिक को अपने शहर को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में पूरी ईमानदारी से पहल करनी होगी। सिर्फ और सिर्फ शिकायत करने से काम नहीं चलेगा। उम्मीद है कि नया वर्ष खारीतट संदेश के सुधि पाठकों, विज्ञापनदाताओं व एजेंटों के जीवन में खुशहाली लाए।
अंत में यह वर्ष 2020 है। ऐसे में आप कभी भी पूर्व की तरह ईस्वी का वर्ष अधूरा नहीं लिखें। न किसी कागजात पर न किसी पर्ची पर। आपकी आदत हो चुकी है कि वर्ष 2019 के बजाय 19 लिखने की। यह भूल पूरे वर्ष भर 2020 में कतई न करें। यह छोटी सी गलती आपको मुसीबत में डाल सकती है।
खारीतट संदेश की ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ। जय हिन्द।
दिनेश ढाबरिया

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