बदले-बदले से ‘सरकार’ नजर आते हैं…

  • Devendra
  • 09/01/2020
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पटरी पार के जनप्रतिनिधियों को जनता से बेहतर तालमेल बैठाकर वहां की समस्याओं का समाधान करना होगा। तभी इस कार्यालय का उद्देश्य सार्थक होगा। शहर की सरकार के नुमाइंदों को भी हर दिन की प्रगति रिपोर्ट पर गहरी नजर डालनी होगी, पटरी पार के लोगों की समस्याओं से रू-ब-रू होकर उसका समाधान निकालना होगा।
जय एस. चौहान
बीजगणित में समय और दूरी को लेकर कई रोचक सवाल पूछे जाते हैं। मसलन बिजयनगर से अजमेर की दूरी करीब 63 किलोमीटर है और साइकिल की रफ्तार 22 किलोमीट प्रतिघंटा है तो साइकिल सवार कितनी देर में अजमेर पहुंच जाएगा। बिजयनगर में शहर की सरकार अपनी रफ्तार बढ़ाकर लक्ष्य को पाने के लिए कवायद शुरू कर दी है। अच्छी बात है। क्योंकि समय कम है, और काम बहुत ज्यादा।
बिजयनगर शहर की सरकार इन दिनों बदले-बदले से नजर आने लगे हैं। शहर वही है, लोग वही हैं, समस्याएं वही हैं, पर सरकार के मिजाज बदले-बदले से हैं। शहर की ‘सरकार’ का मिजाज कुछ इस तरह बदला कि पटरी पार के लोगों की खोज-खबर लेने लगे हैं।

साढ़े चार साल उनींदी में बिताने वाली शहर की सरकार तीन दिन में तीन महीने का काम और घंटों का काम सेकेंड में निपटाने पर जोर दे रही है। सात-आठ महीने बाद शहरी सरकार के चुनाव के मद्देनजर ही सही, शहर की सरकार का जाग जाना अच्छी बात है। निकाय चुनाव में वोट बटोरने की कवायद में सरकार की यह ‘रणनीति’ कितनी सफल हो पाती है, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सरकार की हड़बड़ाहट से खासकर पटरी पार के लोग खुश ही नहीं अचंभित भी हैं।

पटरी पार वालों की यह लम्बित मांगें पूरी करने में आखिर इतना समय क्यों लगा? यह कार्य तो तब भी किया जा सकता था जब शहर के लोगों को ‘स्मार्ट सिटी’ का ख्वाब दिखाया गया था। हालांकि राजनगर में पालिका का उप कार्यालय खोलना पटरी पार वालों की समस्याओं का फौरन समाधान करना है। उम्मीद है कि शहर की सरकार का लक्ष्य पूरा हो और पटरी पार के लोगों की समस्या का निदान हो। इसके लिए पटरी पार के जनप्रतिनिधियों को जनता से बेहतर तालमेल बैठाकर वहां की समस्याओं का समाधान करना होगा। तभी इस कार्यालय का उद्देश्य सार्थक होगा।

शहर की सरकार के नुमाइंदों को भी हर दिन की प्रगति रिपोर्ट पर गहरी नजर डालनी होगी, पटरी पार के लोगों की समस्याओं से रू-ब-रू होकर उसका त्वरित समाधान निकालना होगा। इसमें लापरवाही बरतने पर उप कार्यालय खोलने का मकसद पूरा नहीं हो सकेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि उप कार्यालय का हश्र स्मार्ट सिटी के सपने की तरह नहीं होगा। लक्ष्य को पूरा करने और उप कार्यालय का मकसद पूरा करने के लिए पूरी शिद्दत से जमीनी स्तर पर ईमानदारी से काम करना होगा। क्योंकि समय कम है और काम बहुत ज्यादा। स्वच्छता को लेकर भी शहर की सरकार को पहल करने की जरूरत है। शहर के नागरिकों को भी इस कार्य में शहर की सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाना चाहिए। क्योंकि स्वच्छता सिर्फ सरकार का ही नहीं, नागरिक का भी दायित्व है।
जय हिन्द – जय भारत

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