80 रोगियों की जांच, 32 मरीजों की नि:शुल्क शल्य चिकित्सा

  • Devendra
  • 05/02/2020
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आयुर्वेद विभाग एवं जैन सोश्यल ग्रुप बिजयनगर के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय आवासीय आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर
बिजयनगर। आयुर्वेद विभाग एवं जैन सोश्यल ग्रुप बिजयनगर के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय आवासीय आयुर्वेद शल्य चिकित्सा शिविर का शुभारम्भ सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष सचिन सांखला के मुख्य आतिथ्य में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी एसएस जैन ने की। कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर स्थानकवासी श्रावक संघ के मंत्री ज्ञानसिंह सांखला बतौर विशिष्ठ अतिथि मौजूद रहे। इससे पूर्व ग्रुप के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने णमोकार मंत्र के साथ शिविर की शुरुआत की।

जेएसजी अध्यक्ष महावीर कोठारी ने बताया कि शिविर के आरंभ होने पर दो दिन 3 व 4 फरवरी को रोगियों की जांच एवं भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की गई। शिविर में कुल 220 मरीजों का पंजीकरण कर 80 रोगियों की जांच करते हुए 32 मरीजों को नि:शुल्क शल्य चिकित्सा के लिए भर्ती किया गया एवं शेष को उपचार परामर्श दिया गया। शिविर शुभारम्भ के मौके पर ग्रुप सचिव ज्ञानचन्द खाब्या, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र छाजेड़, रूपचन्द नाबेड़ा, नरेन्द्र बड़ौला, दिलीप मेहता, पुखराज डांगी, सुखराज मंडिया, अनिल सिसोदिया, दिलीप तलेसरा, भागचन्द बाबेल, विनय कर्नावट, महावीर पामेचा, अनिल नाबेड़ा, राजेश बाफणा, सुभाष लोढ़ा आदि सदस्य मौजूद थे।

आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा टीम में अर्श रोग के सिद्धहस्त विशेषज्ञ डॉ. रमाशंकर पंचौरी, डॉ. सुनिल कानोडिय़ा, डॉ. श्याम सुन्दर स्वर्णकार, डॉ. विनित जैन एवं डॉ. सुनिल शर्मा शामिल थे। शिविर प्रभारी डॉ. सुनिल शर्मा ने बताया कि शिविर में पहुंचे ज्यादातर मरीज संतुष्ट हैं।
डॉ. शर्मा ने बताया कि वर्तमान में भागदौड़ की जिंदगी में इंसान इतना व्यस्त हो गया कि वो अपने लिए समय नही निकाल पा रहा है। ऐसे में उसे कई असाध्य रोग घेर लेते है। जिनमें से अर्श रोग भी शामिल है। इस रोग के मुख्य कारणों में कब्ज, लगातार बैठे रहना, पैदल कम चलना, पूरे दिनभर कुछ न कुछ खाते रहना, गरिष्ठ भोजन अर्थात् खीर, पूडी, फास्ट फूड खाना, समय पर भोजन न करना आदि है।
बचाव के उपाय
डॉ. शर्मा ने बताया कि जिस किसी व्यक्ति को अर्श रोग की शिकायत हो जाती है उसे प्रात:काल ताम्बे के लोटे में भरा हुआ पानी पीना चाहिए। रोजाना प्रात: योग, व्यायाम, भ्रमण, सुबह नाश्ता, दोपहर का भोजन समय पर और खाने के बाद छाछ का सेवन, फाईबर सब्जियों का सेवन जैसे खीरा, ककड़ी, अलसी का बीज आदि, इसबगोल की भूसी का एक चम्मच सेवन गर्म पानी के साथ, शौच करते समय पेट पर जोर नहीं लगाना आदि। इन बातों का ध्यान रखा जाए तो इस रोग से काफी हद तक बचा जा सकता है।
चार माह से था परेशान
शिविर में समीपवर्ती ग्राम आकोला से पहुंचे रोगी लादूलाल जाट ने बताया कि वो पिछले चार माह से भगंदर की क्रोनिक अवस्था से बेहद परेशान हो रहे थे। शुरू में कुछ समझ में नहीं आया तो गांव के ही कम्पाउडर से परामर्श एवं दवाईयां लेकर स्वास्थ्य लाभ लेने का प्रयास करते रहे। लेकिन स्थिति ज्यादा बिगड़ती गई। ऐसे में बिजयनगर में उक्त कैम्प के लगने की सूचना मिली तो वे तुरंत यहां चले आये। जाट ने बताया कि यहां डॉ. कानोडिय़ा साहब ने अच्छे से चैक कर लिया है और मुझे यहां से बिलकुल ठीक करके घर भेजने का आश्वासन दिया है। इसके बाद से मैं बहुत उत्साहित हूं कि मुझे इस रोग से छुटकारा मिल जाएगा।

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