साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से रूबरू हो युवा पीढ़ी-गहलोत

  • Devendra
  • 09/02/2020
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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने साहित्य को किसी भी देश का भूत, भविष्य और वर्तमान दर्पण बताते हुए कहा है कि युवा पीढ़ी को साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से रूबरू होना चाहिए ताकि इससे उनके बौद्धिक विकास के साथ उन्हें देश-दुनिया और समाज की वास्तविकता का पता चल सके।

श्री गहलोत शनिवार को काव्या फाउंडेशन जयपुर की ओर से आयोजित काव्य संध्या और साहित्यकार सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के साथ साहित्य, संस्कृति और संस्कारों से रूबरू हो। इससे उनका बौद्धिक विकास तो होगा ही उन्हें देश-दुनिया और समाज की वास्तविकता भी पता चल सकेगी। उन्होंने कहा कि साहित्यकार अपनी रचनाओं से जनमानस को सही दिशा देने की क्षमता रखते हैं। राज्य सरकार पत्रकार, साहित्कार और लेखकों को सम्मान और सुविधाएं देने मेें किसी तरह की कमी नहीं रखेगी।

उन्होंने कहा कि साहित्य किसी भी देश के भूत, भविष्य और वर्तमान का दर्पण है। साहित्य और साहित्यकारों का सम्मान हमारी परंपरा रही है। इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार राजस्थान के साहित्यकारों और लेखकों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से बजट घोषणा के अनुरूप राजस्थान लिटरेचर फेस्टिवल भी जल्द आयोजित कराएगी। मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध लेखक गुरू रवीन्द्रनाथ टैगोर के कथन का जिक्र करते हुए कहा कि मानवता राष्ट्रवाद से बड़ी है। उनका कहना था कि मानवता ही नहीं बचेगी तो राष्ट्रवाद कहां रहेगा। देश के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज की स्थितियों मेें हमें गुरूदेव के इन शब्दों को याद रखना चाहिए।

श्री गहलोत ने कहा कि आज देश में मानवता को भूलकर छद्म राष्ट्रवाद का माहौल बनाया जा रहा है। हमें संविधान की मूल भावना का आदर करते हुए आपसी सद्भाव और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए। इस काम में भी साहित्य जगत की बड़ी भूमिका है। इस अवसर पर कला, साहित्य एवं संस्कृति मंत्री डॉ. बीडी कल्ला ने साहित्य को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि जितना अच्छा साहित्य होगा उतना ही अच्छा हमारा समाज होगा। इस मौके काव्या फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. परीक्षित सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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