‘एक से ज्यादा देशों में हो सकेगा राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन’

  • Devendra
  • 26/02/2020
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नई दिल्ली। (वार्ता) भारत ने 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में निशानेबाजी और तीरंदाजी को वापस लाकर एक नयी पहल की शुरुआत की है और भविष्य में एक राष्ट्रमंडल खेलों का एक से ज्यादा देशों में एक साथ आयोजन किया जा सकेगा। निशानेबाजी और तीरंदाजी को बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजकों ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था लेकिन भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने अपने अथक प्रयासों से ना केवल निशानेबाजी को बल्कि तीरंदाजी को भी राष्ट्रमंडल खेलों में लौटा दिया। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की निशानेबाजी और तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी अब भारतीय शहर चंडीगढ़ जनवरी 2022 में करेगा।

एनआरएआई के अध्यक्ष रणइंदर ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में भारत के सफल प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा,“ओलंपिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किन्हीं खेलों से बाहर किए गए खेल को वापस लौटाया गया है और लौटाए गए खेल की मेजबानी कोई दूसरा देश करने जा रहा है।” रणइंदर ने कहा,“यह एक अभूतपूर्व पहल है और इससे भविष्य के खेल आयोजनों को नयी दिशा मिलेगी। राष्ट्रमंडल खेलों का इतिहास देखा जाए तो अब तक आठ-दस देशों ने ही इन खेलों की मेजबानी की है और 78 सदस्य देशों में से अधिकतर देश इन खेलों की मेजबानी करने में सक्षम नहीं है। लेकिन हमारी इस पहल से मेजबानी को नयी दिशा मिल सकती है। भविष्य में ऐसा हो सकता है कि एक से ज्यादा देश एक राष्ट्रमंडल खेलों की एक साथ मेजबानी कर सके।”

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा,“उदाहरण के तौर पर भारत ने कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में निशानेबाजी, जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम में एथलेटिक्स और आईजी स्टेडियम में जिमनास्टिक का आयोजन किया जा सकता है। इससे मुख्य मेजबान देश का खर्चा कम होगा और नए देशों में खेलों के आयोजन की संभावनाएं बढ़ सकेंगी।” रणइंदर ने कहा कि यह उनका विचार है और इस पर भविष्य में और चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ में निशानेबाजी और तीरंदाजी मुकाबलों की मेजबानी कर भारत ने यह रास्ता खोला है।

एनआरएआई के अध्यक्ष ने अनुभवी निशानेबाज संजीव राजपूत और युवा निशानेबाज मनु भाकर की मौजूदगी में बताया कि इन दो खेलों को बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में लौटाने के लिए कितने अथक प्रयास किए गए। उन्होंने बताया कि भारत के खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ, निशानेबाजी की विश्व संस्था आईएसएसएफ, निशानेबाजी संघ के सदस्य देशों और इंग्लैंड में समान विचार वाले सांसदों के समर्थन से चौतरफा दबाव बनाया गया और इन खेलों को वापस उनकी जगह लौटाया गया। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के कार्यकारी बोर्ड ने लंदन में 21 से 23 फरवरी तक हुई अपनी बैठक में राष्ट्रमंडल खेलों की तीरंदाजी और निशानेबाजी स्पर्धाओं को जनवरी 2022 में भारत के चंडीगढ़ शहर में कराने को अपनी मंजूरी दे दी थी। बर्मिंघम खेलों का आयोजन 27 जुलाई से सात अगस्त तक होना है।

राजपूत और भाकर ने इसका स्वागत करते हुए कहा,“हमें खुशी है कि निशानेबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों में वापस ला दिया गया है। पिछले दो साल की मेहनत का फल मिल गया है और अब हम अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे ताकि हम देश के लिए इन खेलों में ज्यादा से ज्यादा पदक जीत सकें।” चंडीगढ़ 2022 और बर्मिंघम 2022 अलग-अलग राष्ट्रमंडल खेल स्पर्धाओं के आयोजन वाले शहर होंगे। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के समापन समारोह के एक सप्ताह बाद सीजीएफ पदक तालिका जारी करेगा जिसमें चंडीगढ़ 2022 में तीरंदाजी और निशानेबाजी मुकाबलों के परिणाम शामिल किए जाएंगे।

रणइंदर ने कहा,“मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारतीय राष्ट्रमंडल खेल (सीजीआई) ने जो प्रस्ताव सीजीएफ के कार्यकारी बोर्ड को भेजा था वह सीजीएफ के कार्यकारी बोर्ड की लंदन में दो दिन पहले हुई बैठक में मंजूर कर लिया गया है। हमने निशानेबाजी और तीरंदाजी मुकाबलों को जनवरी 2022 में चंडीगढ़ में कराने की अनुमति मांगी थी जिसे मंजूर कर लिया गया है। समापन समारोह के अधिकतम एक सप्ताह के अंदर सीजीएफ पदक तालिका जारी करेगा जिसमें इन दोनों खेलों के परिणामों को जोड़ लिया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लेने वाले देशों की आधिकारिक रैंकिंग जारी की जाएगी।”

रणइंदर ने कहा,“यह हमारे लिए एक बड़ी कामयाबी है। मैं इसके लिए अध्यक्ष मार्टिन और सीईओ ग्रेवेमबर्ग का धन्यवाद करता हूं। हम इस मामले में सहयोग के लिए अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी महासंघ (आईएसएसएफ) के अध्यक्ष व्लादिमीर लिसिन और महाचिव एलेक्सजेंडर रेटनर का भी धन्यवाद करते हैं। हम अपने खेल मंत्री किरेन रिजिजू का भी विशेष तौर पर धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने अपने लगातार प्रयासों से इस मामले को सीजीएफ के समक्ष उठाए रखा। हम साथ ही भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष नरेंद्र ध्रुव बत्रा और महासचिव राजीव मेहता का भी धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने लगातार हमारा समर्थन किया।”

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