खनन से बांध की सुरक्षा को लेकर जन सुनवाई में हुआ हंगामा

  • Devendra
  • 28/02/2020
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चित्तौड़गढ़। (वार्ता) राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले में प्रस्तावित दो सीमेंट उद्योगों के लिए लिए आज से शुरू हुई दो दिवसीय जन सुनवाई के पहले ही दिन विस्फोटों से बांध की सुरक्षा सहित अन्य मुद्दों को लेकर जमकर हंगामा हुआ और ग्रामीणों और विशेषज्ञों को बोलने से रोक दिया गया। जिले के निम्बाहेड़ा उपखंड के ग्राम चरलिया गदिया में प्रस्तावित डालमिया ग्रुप के सीमेंट संयंत्र के लिए लाईम स्टोन की करीब 485 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की जानी थी, जिसमें 10 प्रतिशत चरागाह भूमि के लिये पर्यावरण स्वीकृति के लिए अतिरिक्त जिला कलेक्टर मुकेश कलाल एवं प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों के समक्ष जन सुनवाई हुई। शुरूआत में ही संयंत्र समर्थक कुछ लोगों ने ग्रामीणों को अपनी बात रखने से रोका तो हंगामा हो गया। मौके पर मौजूद पुलिस वृत्ताधिकारी जगराम मीणा, थानाधिकारी फूलचंद टेलर और हिमांशुसिंह भी ग्रामीणों से उलझ गये जिससे मामला गर्मा गया।

कुछ देर बाद शुरू हुई जन सुनवाई में खनन में होने वाले विस्फोटों से खनन क्षेत्र से मात्र 285 मीटर दूर मुरलिया बांध की सुरक्षा एवं जल स्त्रोतों पर विपरीत असर पड़ने के साथ ही फैक्ट्री से होने वाले प्रदूषण और पशुधन को नुकसान होने की आशंका के मद्देनजर जनसुनवाई में पहुंचे विषय विशेषज्ञों ने विरोध दर्ज करवाया तो आनन फानन में अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने जन सुनवाई समाप्त करने की घोषणा कर दी। जन सुनवाई के दौरान मौजूद फैक्ट्री प्रबंधक ग्रामीणों की आपत्तियों के समाधान का आश्वासन देते रहे, लेकिन ग्रामीण संतुष्ट नहीं हुए। जिससे अंत तक हंगामा होता रहा। जन सुनवाई के दौरान संभावित अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल भी तैनात रहा।

जन सुनवाई में जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत मुख्य अभियंता भगवतसिंह तंवर, गौसेवा समिति के एडवोकेट जसवंतसिंह एवं निम्बाहेड़ा बार अध्यक्ष लक्ष्मणसिंह ने दस्तावेजों सहित गंभीर आपत्तियां दर्ज करवाकर स्वीकृति नहीं देने की मांग की। शुक्रवार को अरनिया जोशी ग्राम में एक अन्य जेके सीमेंट उद्योग की खनन क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त विस्फोट की पर्यावरण स्वीकृति के लिए जन सुनवाई प्रस्तावित है। यहां खनन क्षेत्र के समीप ही जिले का सबसे बड़ा गंभीरी बांध है जिसकी सुरक्षा को लेकर ग्रामीण पहले से ही विस्फोटों में बढ़ोत्तरी का विरोध कर रहे हैं। इस बांध के क्षतिग्रस्त होने का असर जिला मुख्यालय सहित नदी परिधि क्षेत्र से सटे साठ गांवों पर हो सकता है।

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