या हुई न बात

यदि शहर को स्वच्छ रखना सिर्फ नगर पालिका की जिम्मेदारी है तो किसी को हक नहीं कि वह शहर को गंदा करे। फिर ऐसे लोगों से जुर्माना वसूलने में कोई हर्ज नहीं। उम्मीद की जानी चाहिए कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए शहर का हर नागरिक अपनी भूमिका निभाए।
– जय एस. चौहान –
सुबह का भूला यदि शाम को लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते, देर आयद, दुरुस्त आयद, अंत भला तो सब भला… भारतीय समाज में प्रचलित ये लोकोक्तियां बिजयनगर नगर पालिका के लिए सटीक बैठ रही हैं। ठेठ मारवाड़ी में अपन इसी कसरत को ठाणे आबो कहते हैं।

गोया यह कि देशव्यापी स्वच्छता अभियान के प्रति अपनी जिम्मेदारी दिखाते हुए बिजयनगर नगर पालिका अब शहर को सुंदर बनाने को फिक्रमंद नजर आने लगी है। गंदगी के कारण नाक पर रुमाल ढकने वालों को अब खुश होना चाहिए। स्वच्छता और सफाई से ही स्मार्ट सिटी की बुनियाद रखी जाए तो इसमें हर्ज क्या है? अच्छी बात यह कि नगर पालिका का पूरा महकमा इस नेक कार्य में लगा हुआ है।

उम्मीद है कि नगर पालिका के इस नेक कार्य में आम जनता व दुकानदारों का सहयोग मिलेगा। यह सही है कि शहर की नालियों व वार्डों की गंदगी के उलाहने की फाइल नगर पालिका में बहुत मोटी हो चुकी है, पर इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इसके लिए आम लोग भी कम जिम्मेदार नहीं।

गंदगी को लेकर शिकायत करने वालों की संख्या कम नहीं है तो उन लोगों के तादात भी कम नहीं जो पड़ोस के खाली प्लॉट में घर का कचरा फेंकना अपना अधिकार समझते हैं। अब इससे परहेज करना होगा।
इसी तरह शहर में सड़क किनारे दुकान चलाने वालों के पास सब कुछ तो होता था पर डस्टबिन नहीं। चाय-नाश्ते की दुकानों पर लोग दोना-प्लेट व डिस्पोजल गिलास नालियों में फेंक कर चल देते थे। इन दोनो-प्लेटों व गिलास से जब नालियां जाम हो जाती थीं तब भी गिरेबां नगर पालिका का ही पकड़ा जाता था। अब नगर पालिका ने शहर के दुकानदारों को मामूली रकम पर डस्टबिन उपलब्ध कराया है। यह अभियान सप्ताह भर चलेगा।

उम्मीद है दुकानदार अपने ग्राहकों को डस्टबिन में ही दोना-प्लेट व गिलास डालने का आग्रह करेंगे। ग्राहकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। इसके बाद योजना के मुताबिक नगर पालिका के कर्मचारी व अधिकारी घर-घर जाकर कचरा पात्र देंगे। शहर को साफ-सुथरा रखना यदि नगर पालिका की जिम्मेदारी है तो इस शहर को सुंदर बनाना हम सब का कर्तव्य भी है। इसके बावजूद यदि लोग अपने कर्तव्य से विमुख हों तो उस पर जुर्माना लगाना न्यायसंगत ही है।

हालांकि नगर पालिका द्वारा जुर्माने की तय राशि कुछ लोगों को अधिक लग सकती है पर कारगर असर के लिए बहुत अधिक नहीं। बस, जुर्माना वसूलने में भेदभाव न हो।

यदि शहर को स्वच्छ रखना सिर्फ नगर पालिका की जिम्मेदारी है तो किसी को हक नहीं कि वह शहर को गंदा करे। फिर ऐसे लोगों से जुर्माना वसूलने में कोई हर्ज नहीं। उम्मीद की जानी चाहिए कि शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए हर नागरिक अपनी भूमिका निभाए। सामाजिक, धार्मिक व राजनीति संगठनों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।

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