महिलाओं और बच्चों की तुलना में पुरुषों को कोरोनावायरस का ज्यादा खतरा

  • Devendra
  • 09/03/2020
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नई दिल्ली। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं और बच्चों में कोरोना वायरस का असर कम दिख रहा है। मृतकों के आंकड़ों में महिलाओं और बच्चों की संख्या कम है। चाइनीज सेंटर्स ऑफ डिजीज कंट्रोल ने इस पर अध्ययन किया है और जो भी जानकारी मिली है वह इसी अध्ययन से है। कोरोना वायरस से संक्रमित जिन 44 हजार लोगों पर यह अध्ययन किया गया उनमें से 2.8 प्रतिशत पुरुषों की और 1.7 प्रतिशत महिलाओं की मौत हुई है। उम्र की बात करें तो जहां वायरस से संक्रमित 0.2 प्रतिशत बच्चे और किशोरों की मौत हुई है, वहीं 80 साल से ज्यादा उम्र के 15 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है। क्या इन आंकड़ों के ये मायने हैं कि महिलाओं और बच्चों को कोरोना वायरस होने का डर कम है।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले कम है। हालांकि, वैज्ञानिक इससे बिल्कुल हैरान नहीं हैं। फ्लू सहित अन्य संक्रमणों में भी ऐसा ही देखने को मिलता है। इसकी वजह ये है कि अपनी लाइफस्टाइल के कारण पुरुष का स्वास्थ्य महिलाओं के मुकाबले खराब होता है। उनके लाइफस्टाइल में धूम्रपान और शराब महिलाओं के मुकाबले ज्यादा शामिल होते हैं। डॉक्टर मैकडरमेट कहते हैं, “धूम्रपान आपके फेफड़ों को नुक़सान पहुंचाता है और ये कोई अच्छी बात नहीं है।”

ये समस्या चीन के मामले में ज्यादा हो सकती है, जहां एक आंकड़े के मुताबिक 52 प्रतिशत पुरुष और सिर्फ तीन प्रतिशत महिलाएं धूम्रपान करते हैं। लेकिन, पुरुषों और महिलाओं की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण को लेकर किस तरीके से प्रतिक्रिया करती है ये अंतर भी मायने रखता है। यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंगलिया में प्रोफेसर पॉल हंटर कहते हैं, “महिलाओं में आंतरिक रूप से पुरुषों से अलग प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं होती हैं, महिलाओं को ऑटो-इम्यून डिजीजिस (प्रतिरक्षा तंत्र के अति सक्रिय होने के कारण होने वाली बीमारियां) होने का ज्यादा खतरा होता है और इस बात के काफी प्रमाण भी हैं कि महिलाएं फ्लू के टीकों के लिए बेहतर एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं।”

आधिकारिक रूप से इसका जवाब ना है, लेकिन विशेषज्ञों में इसे लेकर संदेह है। गर्भावस्था में शरीर में बहुत कुछ होता है। जैसे इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली भी कमजोर हो जाती है और इससे शरीर भ्रूण को गर्भाशय में स्वीकार कर पाता है। लेकिन, इससे महिलाओं को संक्रमण होने का खतरा भी बढ़ जाता है। समान उम्र की अन्य महिलाओं के मुकाबले गर्भवती महिलाओं की फ्लू से मौत होने की आशंका ज्यादा होती है। ब्रिटेन की सरकार का कहना है कि इस बात के “कोई स्पष्ट संकेत नहीं है” कि गर्भवती महिलाएं कोरोन वायरस से ज्यादा गंभीर रूप से प्रभावित होती हैं। प्रोफेसर हंटर कहते हैं, “मुझे इस पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। यह सिर्फ नौ गर्भवती महिलाओं से मिले आंकड़ों पर आधारित है इसलिए मुझे ये कहना ठीक नहीं लगता कि सबकुछ ठीक है। अगर मेरी पत्नी की बात करें तो मैं उन्हें सावधानी बरतने, हाथ धोने और ध्यान रखने के लिए कहूंगा।”

बच्चों को कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है। अभी तक का सबसे कम उम्र का मामला, एक दिन के बच्चे का है। बच्चों में कोविड-19 के लक्षणों के बारे में बहुत कम जानकारी प्राप्त हुई है लेकिन लक्षण हल्के-फुल्के होते हैं जैसे बुखार, नाक बहना और खांसी। छोटे बच्चे भी इससे बीमार हो सकते हैं। फ्लू के मामले में भी यही होता है, जिसमें पांच साल से कम उम्र (खासतौर पर दो साल से कम) के बच्चों को खतरा ज्यादा होता है। डॉक्टर पनखनिया कहते हैं, “लोग उम्र बढ़ने पर ज्यादा बीमार हो जाते हैं क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।” उम्रदराज लोगों में या पहले से ही कमजोर प्रतिरोधक क्षमता व गंभीर अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में ज्यादा संक्रमण पाया गया है। उन्हें इसका ज्यादा खतरा होगा। लेकिन, बच्चों में वायरस का असर हल्का ही पाया गया है।

एक बच्चे और व्यस्क की प्रतिरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण अंतर होते हैं। बचपन में हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली अपरिपक्व होती है और वो अति प्रतिक्रिया कर सकती है। इसलिए बच्चों में बुखार होना सामान्य बात है। प्रतिरक्षा प्रणाली का अति सक्रिय होना भी ठीक नहीं है क्योंकि इससे शरीर के बाक़ी हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। कोरोना वायरस के घातक होने का ये भी एक कारण है। डॉक्टर मैकडरमेट कहते हैं, “आपको लगता है कि ये और बिगड़ेगा लेकिन ऐसा नहीं होता। ये वायरस ऐसा कुछ जरूर करता है जिससे बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली उत्तेजित नहीं होती। लेकिन ये क्या करता है ये स्पष्ट नहीं है।” हालांकि, ये भी याद रखने वाली बता है कि बच्चों को लेकर इस बारे में जानकारी उपलब्ध नहीं है।

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