फिर रह गया मलाल

तनिक सोचिए, आप आश्वासन देते फिरें और हम मलाल भी न कर सकें, यह कहां का इंसाफ है। आप भेदभाव करें और हम उलाहना भी न दें, यह नहीं हो सकता। आपका आश्वासन ‘फोकट’ का हो सकता है, लेकिन हमारे मलाल में पीड़ा भी है और दर्द भी।
बिजयनगर में सबकुछ ठीक चल रहा है तो बहुत कुछ भगवान भरोसे भी है। स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा के संदर्भ में यह बात कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होनी चाहिए। बिजयनगर में रिक्त पड़े चिकित्सकों की खाली पड़ी कुर्सियां ‘जीवन के देवता’ की बाट जोह रही है। कुछ इसी तरह का हाल उच्च शिक्षा को लेकर भी है। बिजयनगर में वर्षों से राजकीय महाविद्यालय खोलने की मांग की मंशा पर इस वर्ष भी पानी फिर गया। हमें भिनाय या फिर भाजपा सरकार में मसूदा में राजकीय महाविद्यालय खोलने पर कोई एतराज नहीं है।

लेकिन मलाल जरूर है। जनप्रतिनिधि यदि सिर्फ आश्वासन ही देना जानते हैं तो जनता के हिस्से सिवाय मलाल के शेष क्या रह जाता है। मलाल इसलिए भी कि राजकीय कॉलेज खोलने का पैमाना समझ से परे है। आबादी के हिसाब से भी मसूदा, भिनाय से काफी अधिक आबादी बिजयनगर की है। बिजयनगर व गुलाबपुरा के विभिन्न हायर सेकेंडरी स्कूलों से हर वर्ष 1200 से अधिक विद्यार्थी निकलते हैं। इन सभी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अजमेर या फिर भीलवाड़ा सहित अन्य शहरों में जाना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को इन शहरों में भेजना काफी मुश्किल होता है।

आबादी सहित अन्य पैमाने की कसौटी पर बिजयनगर में एक अदद राजकीय महाविद्यालय की आवश्यकता वर्षों से है। सत्ता किसी की भी हो, बिजयनगर की इस महती मांग की उपेक्षा की जाती रही है। ऐसे में यहां के शिक्षाविदों, गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्ध लोगों व विद्यार्थियों को मलाल तो रहेगा ही। शब्द बदल भी दें तो हाथ मलने के सिवाय यहां के लोगों के पास कोई और चारा शेष नहीं है। तनिक सोचिए, आप आश्वासन देते फिरें और हम मलाल भी न कर सकें, यह कहां का इंसाफ है। आप भेदभाव करें और हम उलाहना भी न दें, यह नहीं हो सकता। आपका आश्वासन ‘फोकट’ का हो सकता है, लेकिन हमारे मलाल में पीड़ा भी है और दर्द भी। विश्वास न हो तो आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी और उसके अभिभावक से उसकी पीड़ा को महसूस कीजिए। आश्वासन बांचने के बाद फुर्सत हो तो…।

बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खोलने के लिए जागरूक नागरिकों व शिक्षाविदों को आगे आना ही होगा। तभी बात बनेगी। वर्ना आश्वासन और मलाल के बीच यूं ही द्वंद्व चलता रहेगा। -जय हिन्द।
जय एस. चौहान

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