कॉलेज हो अपना, दूर है सपना!

  • Devendra
  • 19/03/2020
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बिजयनगर स्थित राजकीय चिकित्सालय में चरमराई हुई स्वास्थ्य सेवाओं के बाद उच्च शिक्षा की भी अनदेखी की जा रही है। राजकीय महाविद्यालय की मांग अधरझूल में है। जनप्रतिनिधि आश्वासन यहां का देते हैं और कालेज कहीं और खुलता है। राजकीय कॉलेज का सपना दूर नजर आ रहा है।
बिजयनगर। अजमेर जिले के आखिरी छोर पर स्थित बिजयनगर की राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के बाद अब शिक्षा के क्षेत्र में भी अनदेखी कर रही है। सर्वविदित है कि बिजयनगर में स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल है। नियुक्ति आदेश के बावजूद पांच में से सिर्फ एक चिकित्सक ने ही बिजयनगर राजकीय चिकित्सालय में ज्वाइन किया है, शेष पद रिक्त हैं। इसी तरह वर्षों पुरानी मांग के बावजूद इस बजट में बिजयनगर को राजकीय महाविद्यालय नसीब नहीं हुआ।

गौर करने वाली बात यह है कि बजट में भिनाय को राजकीय महाविद्यालय का तोहफा तो दे दिया गया लेकिन बिजयनगर की आबादी अधिक होने के बावजूद भरपूर उपेक्षा की गई। यह यहां के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी है या फिर यहां की जनता का दुर्भाग्य, यह तय किया जाना अभी शेष है। बिजयनगर के बुद्धिजीवी, प्रबुद्ध नागरिक शिक्षाविद् बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खोलने के लिए वर्षों से मांग करते रहे हैं। राज्य में सत्ता बदलती रही लेकिन यह मांग पूरी नहीं हुई। बिजयनगर में राजकीय कॉलेज का सपना दूर की कौड़ी नजर आ रहा है।

अजमेर व भीलवाड़ा जिले की सरहद पर बसें तकरीबन 50 हजार से अधिक की आबादी वाले बिजयनगर में एक अदद राजकीय कालेज नहीं है। बिजयनगर में आसपास के 100 गांवों की आबादी का सीधा आना-जाना रहता है। यहां आवागमन के पर्याप्त संसाधन भी हैं। इसके बावजूद बिजयनगर उच्च शिक्षा व चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। आलम यह है कि पिछले सात माह से बिजयनगर का राजकीय चिकित्सालय डॉक्टरों की बाट जो रहा है। इसी तरह बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय की वर्षों पुरानी मांग की अनदेखी की जा रही है।

गत दिवस विधानसभा सत्र के दौरान भिनाय में राजकीय महाविद्यालय की घोषणा कर दी गई लेकिन बिजयनगर एक बार फिर खाली हाथ रह गया। पिछले कई वर्षों से बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय, पुलिस डिप्टी कार्यालय एवं उपखंड कार्यालय खोले जाने की मांग आमजन द्वारा की जा रही थी। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार में बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खोलने की पुरजोर मांग की लेकिन कॉलेज मसूदा को मिल गया।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत के साथ ही मसूदा क्षेत्र से जीते कांग्रेस के विधायक राकेश पारीक से लोगों ने बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खोले जाने की मांग की, इस पर विधायक पारीक ने शहरवासियों को आश्वस्त किया था कि विधानसभा क्षेत्र में यदि राजकीय महाविद्यालय खुलेगा तो पहले बिजयनगर में ही खुलेगा।

लेकिन गत दिवस भिनाय में राजकीय महाविद्यालय खोले जाने की घोषणा के साथ ही बिजयनगर वासी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं। यदि आबादी के आंकड़ों की बात करें तो मसूदा में तकरीबन 15 हजार व भिनाय में 13 हजार से कुछ ज्यादा की आबादी है। वहीं बिजयनगर की आबादी इन दोनों कस्बों की कुल आबादी से काफी अधिक है। फिर भी बिजयनगर उपखंड, डिप्टी कार्यालय एवं राजकीय महाविद्यालय से महरूम है। यदि बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खुल जाता तो आसपास के सैकड़ों गांवों के विद्यार्थी लाभान्वित हो सकते थे।
जनप्रतिनिधियों का मौन धारण चर्चा का विषय
जनप्रतिनिधियों का मौन शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यहां के जनप्रतिनिधि कोई भी राजनेता आता है तो उसके स्वागत करने या फिर उसके साथ फोटो क्लिक कराने में तो बहुत जल्दबाजी दिखाते हैं। साथ ही जनप्रतिनिधि के साथ अपनी उपस्थिति को सोशल मीडिया पर ऐसे दर्शाते हैं जैसे उनसे बड़ा कोई नेता नहीं है, लेकिन असल में शहर की समस्याओं के लिए उनके पास तनिक भी समय नहीं है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि वोट मांगने के लिए ये लोग घर-घर तो आ जाते हैं लेकिन जीतने के बाद किसी से भी नहीं पूछते कि आपके क्षेत्र की समस्या क्या है। जबकि इनको पता है कि यहां पर सरकारी कॉलेज, उपखंड कार्यालय, डिप्टी कार्यालय की बेहद आवश्यकता है। लेकिन इन मुद्दों पर इन्होंने चुप्पी साध रखी है। ऐसे में सबकी जुबान पर यहीं सवाल बार-बार आ रहा है कि बिजयनगर की इतनी उपेक्षा आखिर क्यों की जा रही है?

हर वर्ष 1200 से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं बाहर
बिजयनगर गुलाबपुरा में लगभग 12 उच्च माध्यमिक विद्यालय है और इन विद्यालयों से प्रतिवर्ष औसतन 1237 विद्यार्थी कॉलेज शिक्षा के लिए नसीराबाद, अजमेर या फिर भीलवाड़ा जाते हैं। इनमें से कुछ विद्यार्थी जयपुर या उदयपुर प्रवेश लेते हैं। यदि बिजयनगर या गुलाबपुरा में राजकीय महाविद्यालय खुल जाता तो इन बच्चों को प्रवेश के लिए अन्य शहरों में जाने की जरूरत नहीं होती।
महाविद्यालय खुलना अति आवश्यक
बिजयनगर में राजकीय महाविद्यालय खुलना अति आवश्यक है। यहां से आसपास के सभी गांवों और कस्बों में आने जाने के पर्याप्त संसाधन हैं। साथ ही बिजयनगर में उच्च माध्यमिक विद्यालयों की संख्या काफी है जहां से प्रति वर्ष सैकड़ों बच्चे 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों में जाते हैं।

श्यामसुंदर चौधरी, जिला सचिव, भारत विकास परिषद
सरकार ने निराश किया है
बिजयनगर आसपास के सैकड़ों गांवों एवं कस्बों का केन्द्र बिन्दु है। यहां के उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बच्चे पढऩे आते हैं। यहां राजकीय महाविद्यालय नहीं होने से उच्च शिक्षा के लिए अजमेर-भीलवाड़ा के महाविद्यालयों में भटकना पड़ता है। सरकार को राजकीय महाविद्यालय यहां खोलना चाहिए था लेकिन मसूदा और भिनाय में महाविद्यालय की सौगात देकर सैकड़ों बच्चों को एक बार फिर से निराश कर दिया है।

छोटूलाल टेलर, सेवानिवृत प्राध्यापक, बिजयनगर
पुरजोर कोशिश हो
निजी महाविद्यालय में दक्ष शिक्षकों के साथ अपनी पसंद का विषय चुनना चुनौती पूर्ण होता है। ऐसे में विद्यार्थी इधर-उधर भटकने के लिए मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों को पुरजोर कोशिश करनी चाहिए कि यहां जल्द राजकीय महाविद्यालय खुले।

रघुनन्दन त्रिपाठी, छात्र

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