संयम की साधना जरूरी

धैर्य स्वभाव हो सकता है लेकिन संयम तो  जीवनशैली है। यह संयम आहार का हो या फिर विहार का, वाणी का हो या फिर व्यवहार का, आचरण का हो या फिर पहनावे का। ये सभी भारतीय संस्कृति व जीवनशैली को मजबूती प्रदान करते रहे हैं।

नोबल कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए सरकारी मिशनरी पूरी शिद्दत से लगी हुई है। … और इसका पूरा फोकस सोशल डिस्टेंसिंग पर केन्द्रित है। इसमें हर व्यक्ति की भूमिका अहम है। यह भूमिका है संयम की। हां, संयम से कुछ-कुछ आपको भी याद आ रहा होगा। यदि नहीं तो हम बताए देते हैं। बिजयनगर व गुलाबपुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में जैन मुनि, जैन साध्वी, संत- महात्मा, कथा वाचक ‘संयम’ पर धर्मसभाओं में प्रवचन देते हैं। हां, वही संयम जो भगवान महावीर के जीवन का आधार रहा। सनातन परम्परा में भी संयम को बेहद जरूरी माना गया है। यही हमारी भारतीय संस्कृति भी है। हां, इतना जरूर याद रखें संयम धैर्य का पर्यायवाची नहीं है।

धैर्य स्वभाव हो सकता है लेकिन संयम तो  जीवनशैली है। यह संयम आहार का हो या फिर विहार का, वाणी का हो या फिर व्यवहार का, आचरण का हो या फिर पहनावे का। ये सभी भारतीय संस्कृति व जीवनशैली को मजबूती प्रदान करते रहे हैं। आखिर हम इन सब बातों का यहां उल्लेख क्यों कर रहे हैं? जिन संयमों का हमने यहां उल्लेख किया है क्या आज हम कसौटी पर खरा उतर रहे हैं। हर व्यक्ति स्वयं से यह सवाल करे, उत्तर मिल जाएगा। हमने इसका जिक्र इसलिए किया  है ताकि हम संयम के पाठ को पुन:स्मरण कर सकें। अपनी संस्कृति को जान सकें। आज कोरोना वायरस ने हमें महसूस करा दिया है कि संयम ही इसका समाधान है। लॉकडाउन में लक्ष्मणरेखा के अंदर यानी अपने घर में रहने का संयम।

अब दूसरी बात, देश के जीवनशैली में कई तरह के वास का उल्लेख किया गया है। रामायण व महाभारत में भी ‘अज्ञातवास’ व ‘एकांतवास’ का उल्लेख है। पांडवों को 14 वर्ष के अज्ञातवास को कौन नहीं जानता। इसी तरह एकांतवास का भी अपना महत्व है। 21 दिन के लॉकडाउन ने एकांतवास का अनचाहा ‘अवसर’ दिया है। भागमभाग से तनिक विश्राम का अवसर। एकांतवास का अपना एक अलग आध्यात्मिक महत्व है। इसलिए, लॉकडाउन में सरकारी आदेश का पालन करते हुए जो अकेले हैं वे एकांतवास  और जो परिवार के साथ हैं वे अज्ञातवास का अनुभव महसूस कीजिए। आपके इसी व्यवहार का राष्ट्र को जरूरत है। आपके परिवार और समाज को भी इसी की जरूरत है।

कुछ अलग से

पिछले छह साल के दौरान डोकलाम में सीमा विवाद और पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों के बाद एयर स्ट्राइक जैसे मुद्दों को प्रधानमंत्री नरेन्द्र दास मोदी ने बखूबी समाधान निकाल लिया। इस सब के लिए हमारी सेना सक्षम है, लेकिन राष्ट्र के अंदर आज हमारी जरूरत है। लॉकडाउन के दौरान सरकार के आदेशों-निर्देशों का पालन करना हमारा कर्तव्य है। हम सब का संयम पुलिस, प्रशासन व चिकित्साकर्मियों को बहुत राहत देगा। देश के लिए इतना तो कर ही सकते हैं।                       जय हिन्द।

दिनेश ढाबरिया

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