नकारात्मक वातावरण न फैलाएं-मुनि प्रियदर्शन

  • Devendra
  • 29/03/2020
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बिजयनगर। कोरोना-19 के कहर ने सारी दुनिया को अपनी जकडऩ में ले रखा है। हर व्यक्ति आतंकित है, भयभीत है। अपना भविष्य उसे खतरे में नजर आ रहा है। मेरा क्या होगा? यह रोग मुझे न लग जाए। हर उपाय करने को तैयार है इस बीमारी से मुक्त होने के लिए, पर विचार करना है कि आखिर यह रोग आया क्यों? इतना खतरनाक वायरस फैलने के पीछे कोई न कोई कारण अवश्य है। नीति का सूत्र है – कार्य एवं कारण का अविनाभाव सम्बन्ध है।

तो कोरोना का कारण है – मानव का असंयम। जब-जब मानव संयम, मर्यादा का उल्लंघन करता है तब-तब प्रकृति उसे दण्डित करती है। धरती के भीतर कितने ही दिनों से लावा इकट्ठा होता रहता है जब वह पराकाष्ठा पर पहुँच जाता है तब ज्वालामुखी फटता है। कोरोना भी प्रकृति का विस्फोट है। मानव के प्रकृति के साथ किए गए अत्याचारों से प्रकृति बोझिल हो गई। कभी सुनामी, भूकम्प… तो कभी बाढ, अकाल अनेक प्रकार से प्रकृति झटके देकर मानव को सुधरने का संकेत करती है पर मानव सुधरने का नाम नहीं लेता। मानवीय अत्याचार प्रकृति पर आज भी निरन्तर जारी है। यह मानवीय अत्याचार सम्पूर्ण मानव जाति ही नहीं अपितु सम्पूर्ण संस्कृति के लिए संकटप्रद बन रहा है फिर भी मानव समझने को तैयार नहीं है।

खान-पान का असंयम : अमर्यादित आचरण, स्वच्छन्द जीवन शैली ऐसे अनेक कारण है इस वायरस की उत्पत्ति के पर क्या हम इससे सीख ले पाएंगे? क्या अपनी प्रवृति सुधार पाएंगे? क्या कुछ सीख ले पाएंगे?हम बचाव के प्रयास कर रहे हैं पर वे भी काफी नहीं है। केवल कुछ दिन के प्रयास से काम नहीं चल सकता, इसके लिए निरन्तर प्रयास करने होंगे एवं अपनी जीवन शैली को परिवर्तित करना होगा। प्रकृति को अपने अनुसार नहीं वरन् हमें प्रकृति के अनुसार ढलना होगा। अगर हम अखाद्य पदार्थों मांस, अण्डे व मछली आदि का त्याग करें। अगर हम प्राकृतिक वातावरण में जीएं – ए.सी. का प्रयोग न कर प्रकृति के साथ रहे ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े। इन सुविधापूर्ण साधनों के प्रयोग से ही हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम किया है।

मन में हर पल हरजीव के प्रति मैत्री भाव रखें। उनके प्रति मंगल मैत्री करे। उन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट न पहुंचायें तभी हम प्रकृति के कोप से बच सकेंगे। हम जैसा सोचते है, वैसा ही वातावरण निर्मित होता है। हर पल कोरोना-कोरोना का नकारात्मक वातावरण न फैलावें। जितनी नेगेटिव चर्चा करते है, वातावरण वैसा ही बनता है। इसलिए कोरोना पर चर्चा न करे। सबके प्रति मंगलभाव करे कि सबका भला हो, सबका कल्याण हो।

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