फिरकीबाजों पर अंकुश जरूरी

  • Devendra
  • 02/04/2020
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प्रशासन को बिना वजह भाग-दौड़ करवाने वाले शहर के किसी भी व्यक्ति को ‘थैंक्यू बिजयनगर’ में शामिल नहीं किया जा सकता। यह शहर की शान में गुस्ताखी है।
नोबल कोरोना वायरस संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरा देश एकजुट है। लॉकडाउन के इस दौर में बिजयनगर में पदस्थापित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी तनिक भी कोताही नहीं बरत रहे। पुलिस व प्रशासन की मुस्तैदी और तत्परता प्रशंसनीय है। स्थानीय जनप्रतिनिधि, स्वयंसेवी संगठन, भामाशाह व पालिका के अधिकारी व कर्मचारियों की कार्यशैली भी ‘शाबासी’ का हकदार है। राज्य सरकार किसी भी नागरिक को भूखा नहीं रहने देना चाहती।

हर जरूरतमंद व्यक्ति तक खाद्य सामग्री या फिर भोजन के पैकेट पहुंचाने के लिए सभी शासन-तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। शासकीय स्तर पर फोन नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जहां शिकायत कर लोग अपनी जरूरत का सामान मंगवा सकते हैं। इसके बावजूद कुछ लोगों को शरारत सूझ रही है। यह शहर के लिए शर्मनाक है। हम बात कर रहे हैं शहर की अहिंसा कॉलोनी में रहने वाले अनिल जुनेजा की। अच्छे खासे परिवार के इस युवक ने जिस तरह प्रशासन से खाद्य सामग्री की गुहार लगाई, वह निंदनीय है। प्रशासन को बिनावजह भागदौड़ करवाने वाले शहर के किसी भी व्यक्ति को ‘थैंक्यू बिजयनगर’ में शामिल नहीं किया जा सकता। यह शहर की शान में गुस्ताखी है।

आखिरकार प्रशासन कैसे जाने कि किसे वास्तविक जरूरत है और कौन ‘फिरकी’ ले रहा है। अव्वल तो यह कि घर में पर्याप्त खाद्य सामग्री होने के बावजूद फिरकी लेने वाले ऐसे लोगों से प्रशासन को सख्ती से पेश आते हुए कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, यदि प्रशासन यह तय कर दे कि इस तरह का कोई भी व्यक्ति जो वास्तव में जरूरतमंद है, उसे पड़ोसी या फिर अपने किसी रिश्तेदार से भी पुष्टि करवाना आवश्यक है, तो बहुत संभव है कि इस पर अंकुश लग सकता है। अंत में खारीतट संदेश के सभी पाठकों से विनम्र अपील है कि लाकडाउन के निर्देशों का पालन करें। साथ ही लॉकडाउन में सेवा में तत्पर रहने वाले पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सा सेवा में जुटे चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ भी पूरी सजगता से अपना खयाल रखें। जयहिन्द।
दिनेश ढाबरिया

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