सभी देशों के लिए सुलभ हो जलवायु प्रौद्योगिकी: जावड़ेकर

  • Devendra
  • 28/04/2020
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नई दिल्ली। (वार्ता) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने की प्रौद्योगिकी सभी देशों को किफायती लागत पर सुलभ कराने की मांग की है। ‘पीटर्सबर्ग जलवायु वार्ता’ के 11 वें संस्करण को संबोधित करते हुये श्री जावड़ेकर ने कहा कि जिस प्रकार कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ के वायरस की खोज में पूरी दुनिया मिलकर काम कर रही है, उसी तरह जलवायु प्रौद्योगिकी भी सबकी पहुंच में और किफायती लागत पर उपलब्ध होनी चाहिए। कोविड-19 महामारी के कारण इस बार पहली बार यह वार्ता ऑनलाइन हो रही है। इसमें भारत समेत 30 देश हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए विकासशील देशों को और अधिक धनराशि उपलब्ध कराने की माँग की। उन्होंने कहा, “ विकासशील देशों के लिए तत्काल प्रभाव से 10 खरब डॉलर के अनुदान की योजना बनायी जाये।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोविड-19 ने सिखाया है कि थोड़े में भी गुजारा हो सकता है। दुनिया को उपभोग के लंबे समय तक चल सकने वाले तौर-तरीके अपनाने के बारे में सोचना चाहिए। ‘पीटर्सबर्ग जलवायु वार्ता’ की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। हर साल जर्मनी में इसका आयोजन किया जाता है। पहली बार इसका आयोजन ऑनलाइन करना पड़ा है। श्री जावड़ेकर ने जर्मनी की पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण एवं परमाणु सुरक्षा मंत्री स्वेन्जा शूल्जे के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी की। दोनों मंत्रियों ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता के संरक्षण और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा की। उन्होंने कोविड-19 के कारण भारत और जर्मनी में उत्पन्न परिस्थितियों तथा इससे लड़ने के उनके प्रयासों पर भी बात की।

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