लिपिक ग्रेड द्वितीय के अभ्यर्थियों का नए सिरे से होगा जिला आवंटन: गहलोत

  • Devendra
  • 08/05/2020
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जयपुर। (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिपिक ग्रेड द्वितीय भर्ती परीक्षा-2018 के अभ्यर्थियों को जिला एवं विभागों का आवंटन पुनः नई प्रक्रिया से करने के निर्देश दिए। श्री गहलोत आज मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए स्कूल शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा से जुड़े विषयों पर समीक्षा के दौरान यह निर्देश दिए। उन्होेंने कहा कि सभी विभागों को मेरिट के आधार पर उनकी आवश्यकता के अनुरूप चयनित अभ्यर्थियों की सूची उपलब्ध कराएं। उसके बाद संबंधित विभाग मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर उन्हें जिला आवंटित करे। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि भविष्य में सभी भर्तियों में प्रथम नियुक्ति सभी विभागों द्वारा मेरिट एवं काउंसलिंग के आधार पर ही दी जाए।

श्री गहलोत ने कहा कि यूपीए सरकार के समय शिक्षा का अधिकार अधिनियम लाकर गरीब वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने का ऎतिहासिक कदम उठाया गया था। लेकिन गत कुछ वर्षों में इस कानून की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कानून की पारदर्शिता के साथ पालना सुनिश्चित करवाई जाए। इसके लिए अभिभावकों की आय सीमा को एक लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रूपए किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरटीई के जरिए बच्चों को बड़े नामी निजी स्कूलों में भी पढ़ने का अवसर मिले।

बैठक में शिक्षा राज्यमंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं का उच्च अध्ययन एवं करियर को लेकर अपना महत्व है। ऎसे में विद्यार्थियों के भविष्य को ध्यान में रखकर ही इस संबंध में निर्णय लिया जाना उचित होगा। उन्होंने कहा कि विभाग में सीनियर सैकंडरी स्कूल के प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति के लिए नियमों में संशोधन कर इसे तर्कसंगत बनाया जा रहा है। साथ ही वरिष्ठ अध्यापक के चयनितों को जल्द नियुक्ति देने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि गरीब परिवारों के बच्चों को आरटीई के तहत पारदर्शी तरीके से प्रवेश दिलाना सुनिश्चित किया जाएगा।

उच्च शिक्षा राज्यमंत्री भंवर सिंह भाटी ने कहा कि विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर परीक्षाओं को लेकर उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल से 31 मई तक महाविद्यालयों में ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। ताकि नया सत्र एक जून से प्रारंभ किया जा सके। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में करीब तीन लाख से अधिक विद्यार्थियों को ई-कंटेट के आधार पर शिक्षा से जोड़ा गया है। तकनीकी शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने पॉलीटेक्निक कॉलेजों के सिलेबस को आधुनिक शिक्षा के अनुरूप बदला गया है जिससे इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्लेसमेंट प्राप्त करने में आसानी होगी।

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