पूर्वोत्तर के अधिकतर राज्यों की स्थिति प्रोत्साहजनक: डॉ हर्षवर्धन

  • Devendra
  • 09/05/2020
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नई दिल्ली। (वार्ता) केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने पूर्वाेत्तर राज्यों में कोरोना वायरस के कम मामलों को देखते हुए इन राज्याें की सराहना की है और कहा है कि इन राज्यों के अधिकतर जिलों और क्षेत्रों को ग्रीन जोन में देखना काफी राहत भरा और प्रोत्साहित करने वाला है। डॉ हर्षवर्धन ने पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्रियों और अन्य शीर्ष अधिकारियाें के साथ शनिवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग में समीक्षा बैठक में कहा कि केवल असम और त्रिपुरा में ही कोरोना वायरस के मामले देखने को मिल रहे हैं और पूर्वोत्तर राज्यों के अन्य हिस्से ग्रीन जोन में हैं।

उन्होेंने कोरोना वायरस से लड़ने में इन राज्याें की प्रतिबद्वता की तारीफ करते हुए कहा कि जिन राज्यों के जिले ओरेंज जोन में हैं उन्हें अब इन्हें ग्रीन जोन में बदलने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए। पूर्वोत्तर राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि टेस्टिंग सुविधाओं, सर्विलांस, संपर्क सूत्रों की तलाश और स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे में सुधार करके कोरोना वायरस से जीता जा सकता है और समय रहते भारत ने जो तैयारियां की थी उनकी बदौलत भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों को अपना यह स्तर बनाये रखने के लिए अब देश के अन्य हिस्सों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों, छात्रों और विदेशों से आने वाले लोगों की पूर्ण जांच और होम अथवा संस्थागत क्वारंटीन को सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा तथा इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पूरा पालन करना होगा। उन्होंंने कहा कि जिन मरीजों का इलाज हो चुका है, उनके बारे में संशोधित दिशा-निर्देश जारी किये गये हैं और सभी राज्यों को इनका पालन करना है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कुछ राज्यों ने इस दिशा में बेहतर काम किया है और अन्य राज्यों को अपने यहां प्रभावी सर्विलांस, कांटेक्ट ट्रेसिंग, घर-घर में मरीजों का सर्वेक्षण और ऐसे मामलों का जल्द पता लगाने पर ध्यान देना है। इसके अलावा जिन जिलों में कोई भी मामला सामने नहीं आया है अथवा 14 दिनों से कोरोना वायरस के मामले नहीं देखे गये हैं उनमें सीवियर एक्यूट रेस्पिरेट्री इलनेस और इंफ्लूएंजा जैसे मामलों का पता लगाने के लिए सघन सर्विलांस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने सभी राज्यों से आग्रह किया कि वे लोगों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने, कांटेक्ट ट्रेसिंग और सविलांस में सहयोग करने के लिए प्रेरित करें।

इन राज्याें को इस बात की जानकारी भी दी गई कि पूर्वाेत्तर राज्यों के मंत्रालय ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के लिए फंड़ का आवंटन कर दिया है और इन राज्यों को इसे हासिल करने के लिए अपने प्रपोजल को भेजे जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों की सीमायें अंतराष्ट्रीय सीमा पर हैं उन्हें अपने प्रवेश बिंदुओं पर लोगों के आने जाने के लिए सर्विलांस और प्रभावी जांच प्रणाली को अपनाने की जरूरत है तथा क्वारंटीन निर्देशों का पालन भी करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि इस समय कोरोना का प्रकोप है जिसे देखते हुए कोरोना की जांच तथा उपचार कोविड समर्पित अस्पतालों में उपलब्ध है लेकिन अन्य मरीजों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की भी उपेक्षा नहीं होनी चाहिए और इनमें गर्भवती महिलाओं की जांच, उनके सुरक्षित प्रसव, जच्चा-बच्चा देखभाल, तपेदिक के मरीजों की जांच और उपचार, कैंसर मरीजों का इलाज, गुर्दों और दिल की बीमारियों तथा डायलिसिस जैसी सुविधाएं भी मरीजों को दी जानी आवश्यक हैं। यह मौसम वाहक जनित रोगों के लिए अनुकूल है अत: उनके नियंत्रण पर भी ध्यान दिया जाना है।

डॉ हर्षवर्धन ने बताया कि नौ मई तक देश में कोरोना के कुल मरीजों की संख्या 59662 दर्ज की गई और इनमें से 17847 मरीज ठीक हो चुके हैं और 1981 लोगों की मौत हुई है। पिछले 24 घंटों में 3320 नये मामले सामने आए हैं और 1307 मरीज ठीक हो चुके हैं जिनकी रिकवरी दर 29़ 9 प्रतिशत है। देश में अभी काेरोना मरीजों की मृत्यु दर 3़ 3 प्रतिशत है। देश में इस समय 332 सरकारी तथा 121 निजी प्रयोगशालाएं कोरोना वायरस जांच कर रही है और रोजाना 95 हजार टेस्ट हो रहे हैं। देश में अब तक 15,25,631 कोरोना टेस्ट हो चुके हैं। इस बैठक में डॉ हर्षवर्धन के अलावा स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, मिजाेरम के स्वास्थ्य मंत्री डॉ आर लालथंगलिआना, अरुणाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ एलो लिबांग, असम के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डाॅ पीयूष हजारिका और पूर्वोत्तर राज्यों के शीर्ष प्रतिनिधि तथा अधिकारी उपस्थित रहे।

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