डॉक्टरों की हड़ताल के चलते हाईकोर्ट हुआ सख्त

डॉक्टरों की हड़ताल के चलते सही समय पर इलाज नहीं होने के कारण तीन दिन में एक नवजात बच्चे सहित पांच लोगों की हुई मौत
जयपुर। राजस्थान में सरकारी डॉक्टरों की हड़ताल के चलते हालात काफी बिगड़ गए हैं। समय पर उपचार नहीं होने के कारण पिछले तीन दिन में पांच लोगों की मौत हो गई, वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों हालत गंभीर हो रही है। इधर हालात बिगड़ते देख राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने के लिए कहा है।

हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए कि काम पर लौटने वाले डॉक्टरों को गिरफ्तार नहीं किया जाए। सरकारी अस्पतालों में सेवारत चिकित्सकों के मामले में वकील अभिनवन शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंद्राजोग की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। इस याचिका में हाईकोर्ट के समक्ष गुहार लगाई गई थी कि हड़ताल पर डॉक्टरों पर अदालती अवमानना की कार्रवाई की जाए।

उल्लेखनीय है कि पिछले माह डॉक्टरों द्वारा की गई हड़ताल पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। इसके बावजूद डॉक्टर तीन दिन पूर्व फिर हड़ताल पर चले गए। इस मामले में अगली सुनवाई 3 जनवरी को होगी। हालांकि कुछ चिकित्सक सोमवार रात से ही काम पर लौट आए थे।

इधर डॉक्टरों की हड़ताल के चलते सही समय पर इलाज नहीं होने के कारण तीन दिन में एक नवजात बच्चे सहित पांच लोगों की मौत हुई है। प्रदेश के आदिवासी जिले डूंगरपुर में परिजन अपने नवजात बच्चे को लेकर 60 कि.मी. तक अलग-अलग अस्पतालों में भटकते रहे, लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चे का इलाज नहीं हो सका। इलाज में देरी के चलते बच्चे ने दम तोड़ दिया।

जोधपुर में आग से झुलसी 3 वर्षीय बच्ची को जोधपुर के सबसे बड़े उम्मेद अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन सही देखरेख नहीं होने के कारण उसकी मौत हो गई। इसी तरह रविवार को बाड़मेर में एक महिला और बांरा में बुजुर्ग की बीमारी के कारण मौत हो गई। एक व्यक्ति की अलवर में मौत हो गई।

राज्य सरकार ने मंगलवार को फिर साफ किया की आवश्यक सेवा अधिनियम के तहत डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सरकार और डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार को वार्ता संभव है।

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