40 साल से अव्वल है शिक्षण संस्थान

विवेकानन्द केन्द्रीय विद्यालय हुरड़ा की 40वीं वर्षगांठ पर विशेष
सेना, प्रशासन और कॉर्पोरेट घरानों सहित देश-विदेश में कई शीर्ष पदों को सुशोभित कर रहे हैं यहां के पूर्व छात्र-छात्राएं
बिजयनगर। 40 साल पहले तक जब बिजयनगर-गुलाबपुरा क्षेत्र में एक भी अंग्रेजी माध्यम का कोई शिक्षण संस्था नही था तब एलएनजे ग्रुप के चेयरमैन और देश के प्रतिष्ठित उद्योगपति लक्ष्मीनिवास झुंझुनूवाला ने यहां स्कूल खोलने का संकल्प लिया।

इसी विचार के साथ उन्होंने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सरकारी अफसरों से सम्पर्क साधकर स्कूल के लिए भूमि की तलाश शुरू कर दी। यह तलाश हुरड़ा में जाकर पूरी हुई। हुरड़ा के तत्कालीन सरपंच भोलानाथ लढ़ा ने भी झुंझनूवाला के स्कूल खोलने के संकल्प का स्वागत कर शहर सी ग्राम पंचायत क्षेत्र में शाहपुरा रोड पर 48 एकड़ भूमि को स्कूल के लिए आवंटित करवा दिया।

उसके बाद सन् 1977 में झुंनुझनुवाला ने कानपुर आई.आई.टी. की तर्ज पर सुंदर स्कूल भवन का निर्माण करवाया। इस स्कूल की शुरुआत विवेकानन्द विद्या मंदिर बतौर प्राथमिक विद्यालय के तौर पर 152 बच्चों के साथ शुरू की गई तथा वर्तमान में सीनियर सैकण्डरी स्कूल में क्रमोन्नत हो चुके इस विद्यालय में क्षेत्र के करीब 1200 बच्चे अध्ययनरत हैं।

रामार्पण एज्युकेशन सोसायटी नई दिल्ली की ओर से संचालित इस विद्यालय में अध्ययन कर चुके बच्चे आज सेना में उच्च पदों पर आसीन हैं। इसके अलावा कॉर्पोरेट, व्यापार तथा प्रशासन में भी शीर्ष पदों पर हैं। यहां से अध्ययन कर चुके सैकड़ों बच्चे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में उंचे पदों पर हैं।

सर, इसे गुरुदक्षिणा समझें
करीब पांच-सात साल पहले इसी विद्यालय के एक शिक्षक गम्भीर बिमारी से पीडि़त होकर जयपुर के एक निजी अस्पताल में अपना उपचार करा रहे है थे तो उन्हें चिकित्सकों ने ऑपरेशन के लिए भारी रकम का जुगाड़ करने को कह दिया। इसी दौरान जब उनके शिष्यों को मालूम चला तो उन्होंने ऑपरेशन पर खर्च होने वाली राशि का भुगतान कर दिया। पीडि़त शिक्षक ने जब उन बच्चों को राशि लौटाने का प्रयास किया तो उन्होंनें यह कहकर लेने से इंकार कर दिया कि सर इसे आप हमारी गुरुदक्षिणा समझ कर वापस न लौटाएं।

विद्यालय की ख्सायितों फेहरिस्त बड़ी लम्बी चौड़ी है जैसे इस विद्यालय में विद्यालय की प्रार्थना सभा में बच्चे अपने जूते खोलकर जाते है तथा प्रार्थना के साथ ही संस्कृत श्लोकों का उच्चारण भी एक साथ करते हैं। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से सम्बध इस विद्यालय के बोर्ड का परीक्षा परिणाम भी काबिले तारीफ रहता हैं तथा केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय, पेट्रोलियिम मंत्रालय की ओर से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में भी इसी विद्यालय के छात्रों को राज्य का प्रतिनिधित्व करने का गौरव प्राप्त हैं।

सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालय शैक्षिक गतिविधियों के अलावा किसी भी प्रकार की अन्य गतिविधियों का संचालन नहीं कर सकते हैं। जैसे आईआईटी, जेईई, अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी नहीं करवा सकते। विद्यालय में ऐसी गतिविधियों के मैं खिलाफ हूं क्योंकि यदि शैक्षणिक संस्थाओं में ऐसी अन्य गतिविधियों का संचालन करेंगे तो शैक्षिक गतिविधियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

रघुनंदन टी., सचिव, रामार्पण एज्यूकेशन सोसायटी नई दिल्ली

प्रतिभा उभार कर तराशते हैं यहां
विद्या ऐसी हो जिससे बच्चों के मन से डर खत्म हो जाए। विद्यालय में यही प्रयास किया जाता है कि बच्चों के अंदर की प्रतिभा को उभारा जाए फिर उन प्रतिभाओं को और निखारा जाता है। विद्यालय में अनुशासन प्रमुख विशेषता है। प्रार्थनासभा में बच्चों को भारतीय संस्कृति के बारे में बताया जाता है। विद्यालय से निकली कई प्रतिभाएं देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी पहचान बना रखी है। मैंने सर्वप्रथम ज्यॉनिंग यही सन् 1988 में की और मुझे यह स्कूल मुझे अपने परिवार सा महसूस होता है।
आशा गोयल, प्रधानाचार्या, वीकेवी स्कूल, हुरड़ा

मेरे गुरु सर्वश्रेष्ठ थे
मैंने 1997 में प्रथम स्थान से कक्षा टॉप किया था। इसी विद्यालय की देन है कि ऑल इंडिया सीपीएमटी में मेरी 325 वीं रैंक बनी और एएफएमसी में देश से सिर्फ 7 बच्चों का सलेक्शन हुआ जिनमें राजस्थान में से सिर्फ मैं ही केंडिडेट था। हमारी कक्षाओं में उस समय छोटे-छोटे बैच होते थे जिनमें 16 बच्चे पढ़ते थे। मेरे बैच के सभी छात्र आज देश-विदेश में उच्च पदों पर आसीन हैं। हमारे समय में प्रिंसीपल नवीनचंद गौड़ सर थे वो इतने अच्छे थे कि उनकी अच्छाइयां गिनाना मुश्किल है। उन जैसा गुरु आज तक हमने नहीं देखा।


डॉ. अक्षय ओझा, संचालक अक्षय ईएनटी हॉस्पीटल, भीलवाड़ा

मैंने 1999 में 12वीं कक्षा पास की है। हमारे समय में स्कूल का बहुत अच्छा वातावरण रहा था। स्कूल में ऐसा लगता था मानों ऐसा स्कूल और कहीं नहीं होगा। हमारे समय में बहुत अच्छे प्राचार्य जी थे नवीनचंद गौड़ सर उन जैसा प्रिंसीपल सर आज तक नहीं होगा।
अरुण कोगटा, व्यवसायी, पुणे

मैं पिछले 19 वर्षों से इसी विद्यालय में कला के क्षेत्र में बच्चों को प्रेरित कर रहा हूं। अब तक कई प्रतिभाओं को तराश चुका हूं। इनमें नितिन जैन, खुशबू माथुर, अभ्युदय राठौड़, अभिषेक व्यास आदि बच्चे कौशल विकास में अपना सराहनीय योगदान दे रहे हैं। इसी विद्यालय की देन है कि मुझे राजस्थान ललित कला अकादमी के राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। देश के 100 कलाकारों में शामिल हूं।
लक्षपालसिंह राठौड़, ड्राइंग व्याख्याता, वीकेवी, हुरड़ा

मैं नर्सरी से ही यही पढ़ रहा हूं। शैक्षिक वातावरण बहुत अच्छा है। सुबह प्रार्थना स्थल पर जिस प्रकार से संस्कृत के श्लोकों का उच्चारण एकसाथ किया जाता है उससे ऊर्जा मिलती है।


प्रतीक बडौला, कक्षा 10

मेरे पापा ने भी इसी स्कूल में पढ़ाई की और हम बहन-भाई भी यही पढ़ रहे हैं। पापा (राजेश नवाल) वर्तमान में इसी स्कूल में अध्यापक हैं। स्कूल में बहुत अच्छी और बड़ी लाईब्रेरी और कम्प्यूटर लैब है।


आकाश माहेश्वरी, कक्षा 10

मैं पांचवीं से यहीं पढ़ रहा हूं। यदि किसी विषय को लेकर किसी विद्यार्थी को कोई समस्या हो तो शिक्षक उसे तुरंत दूर कर देते हैं। यहां शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी दिए जाते हैं।


सौरभ तिवारी, कक्षा 12

किसी भी स्कूल में प्रवेश लेने से पहले यह देखा जाता है कि स्कूल का वातावरण कैसा है, वहां के शिक्षक और प्राचार्य कैसे हैं, लेकिन इन सभी मामलों में यह स्कूल सर्वश्रेष्ठ है।


शुभम जैन, कक्षा 12

विद्यालय का वातावरण बहुत अच्छा है, यहां के टीचर बहुत ही अच्छे हैं। पढ़ाने का माध्यम बहुत ही अच्छा है।


आयुषी शर्मा, कक्षा 10

यहां पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है साथ ही खेलकूद व अन्य शैक्षिक गतिविधियों में भी बच्चों को प्रोत्साहित किया जाता है।


रितिक बाबेल, कक्षा 12

विद्यालय में उच्च स्तर की कम्प्यूटर एवं प्रयोग-शालाएं हैं। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी अच्छी करवाई जाती है।


सुधांशु छापरवाल, कक्षा 12

मैं 5 साल से यहीं पढ़ रहा हूं। शिक्षकों का व्यवहार बहुत अच्छा है। हमें सर को किसी भी प्रकार की समस्या बताने में कोई झिझक नहीं होती है।


अक्षय सांखला, कक्षा 12

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