सारा का सारा ढांचा अर्थप्रधान हो गया है-लक्ष्मीनिवास झुनझुनवाला

लक्ष्मीनिवास झुंझुनूवाला न केवल प्रसिद्ध उद्योगपति हैं बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़े रहने वाला व्यक्तित्व भी हैं। भीलवाड़ा-गुलाबपुरा सहित कई अन्य शहरों में झुंझुनूवाला ने उद्योग को नई दिशा दी। शिक्षा व संस्कृति के क्षेत्र में भी इनका अतुलनीय योगदान है। प्रस्तुत है लक्ष्मीनिवास झुंझुनूवाला से दिनेश ढाबरिया की बातचीत के प्रमुख अंश।

आप प्रसिद्ध उद्योगपति है, कपड़ा उद्योग से जुड़े है फिर स्कूल खोलने का विचार कैसे आया?
– रामकृष्ण मिशन के पूरे देश में करीबन 100 विद्यालय हैं जिनमें कोलकाता में ही 7 विद्यालय हैं। कोलकाता के विद्यालय से 10 में से 4-5 बच्चे पूरे देश में अव्व्ल आ रहे थे, तो मैंने सोचा कि क्यों न ऐसा विद्यालय की स्थापना गुलाबपुरा के आस-पास के क्षेत्र में हो जिससे यहा के बच्चे भी इस क्षेत्र का नाम रोशन करें, यहां के बच्चे का भी सुनहरा भविष्य हो। बस, फिर क्या मैंने मिशन वालों से बात की तो उन्होंने कहा आप तो विद्यालय शुरू करो बाकी सब अच्छा होगा। तो मैंने हुरड़ा में विद्यालय खोल दिया। विद्यालय खुलने के दो वर्ष बाद ही मुझे रघुनंदन टी. जैसे बहुत ही सज्जन व्यक्ति मिले। उन्हें कभी भी पैसों से प्यार नहीं था और न ही अब है और न होगा। रघुनंदन की वजह से ही इस विद्यालय का इतना अच्छा परीक्षा परिणाम और इस स्कूल से प्रतिभाएं देश ही नहीं विदेशों में भी स्कूल सहित क्षेत्र का मान बढ़ा रही हैं।

शिक्षा का व्यवसायीकरण हो रहा है? आपकी नजरों में चूक कहां हो रही है?
– आज के समय में पैसा खूब हो गया है। आजकल सभी लोगों को लग्जरी टाइप की जिंदगी जीने की लालसा बढ़ सी गई है। आजादी के पहले सभी लोगों की एक साधारण सी जिंदगी हुआ करती थी, लेकिन आजादी के बाद पता नहीं क्या हुआ, सब लोग लग्जरी लाईफ के पीछे दौड़ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आज शिक्षा का भी व्यवसायीकरण हो रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में जो वर्तमान में खामियां हैं, उसे दूर कैसे किया जा सकता है।
– सबसे मूल बात यह है कि सारा का सारा ढांचा ही अर्थप्रधान हो गया है। जब ढांचा ही अर्थप्रधान है तो शिक्षा व्यवस्था भले इससे कैसे अछूती रह सकती थी। जब तक समूचा ढांचा नहीं बदला जाता, तब तक शिक्षा व्यवस्था की जो खामियां हैं वह नहीं सुधर सकती।

कपड़ा उद्योग में कहां चुनौती मिल रही हैं? और उसे कैसे दूर किया जा सकता है?
– कपड़ा व्यवसाय में कही कोई चुनौती नहीं है।

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