हरि नाम ही कलयुग का एकमात्र धर्म

  • Devendra
  • 22/02/2021
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बिजयनगर। इस्कान बिजयनगर में आयोजित रविवारीय कार्यक्रम में हरिनाम के महत्व की चर्चा करते हुए व्यासपीठ से बताया गया कि आस्तिक होने की सही परिभाषा वहीं है कि व्यक्ति भगवान पर पूर्ण विश्वास रखे और उनकी सेवा कीर कामना की निरंतर प्रार्थना करे। जो भगवान नाम को जपते है व भगवान पर पूर्ण विश्वास रखते है उनकी भगवान अवश्य रक्षा करते है। इसलिए हमारी पाठ-पूजा केवल रोज का दैनिक जरूरी मात्र कार्यक्रम ना होकर हमारे जीवन का एक ऐसा अंग होना चाहिए जिसे हम सदैव ज्यादा से ज्यादा प्राथमिकता दे। भगवान का नाम इसमें एकमात्र सरल तरीका है जो बिना किसी व्यक्ति या परिस्थिति विशेष के लिए आसानी से लिया जा सकता है। हमारे नियत दैनिक कार्यो के दौरान भी हम हरि नाम स्मरण कर सकते है। अत: चैतन्य महाप्रभु द्वारा सुझाए गए हरे कृष्ण महामंत्र को निरंतर गुनगुनाते रहना चाहिए। इस मनुष्य जीवन में हमारे लिए सभी परिस्थितियां अनुकूल है तो इसका लाभ क्यों ना लिया जाए क्या पता मृत्यु हमें कब अपने आगोश में ले ले। हमारे सभी वेदों, पुराणों व अन्य धार्मिक ग्रंथों का एकमात्र सार निकाला जाए तो वह एक ही है कि हरि नाम से आप आसानी से अपना उद्धार कर सकते है। गौरतलब है कि इस्कान मंदिर भंवरबाड़ी में नियमित कथा व कीर्तन का आयोजन होता है। प्रतिदिन प्रात: 4:30 से मंगल आरती से शुरुआत के साथ नगर संकीर्तन, भागवत कथा, दर्शन आरती, संध्या आरती आदि का आयोजन होता है। उक्त जानकारी इस्कान के विश्वनाथ पाराशर ने दी।

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