वांछनीय योग्यता नहीं होने के बावजूद छात्र को दे दिया दाखिला

  • Devendra
  • 04/03/2021
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पीडि़त ने परिवाद दर्ज कराया
बिजयनगर। बीबीए डिग्री के लिए वांछनीय योग्यता नहीं होने के बावजूद स्थानीय श्री प्राज्ञ महाविद्यालय में एक छात्र को प्रवेश दे दिया गया। साथ ही प्रथम वर्ष का परिणाम विश्वविद्यालय द्वारा रोके जाने के बावजूद महाविद्यालय ने द्वितीय सेमेस्टर के लिए आवेदन भरवा दिया। परिणाम जारी नहीं होने का खुलासा तब हुआ जब पीडि़त अभिभावक परिणाम रोके जाने का कारण जानने विश्वविद्यालय पहुंच गया। वहां पता चला कि जिस डिग्री के लिए आपने अपने पुत्र को प्रवेश दिलाया है वो इस डिग्री के लिए पात्र ही नहीं है। यह सुनते ही परिजन के होश फाकता हो गए। परिजन अपने आपको ठगा सा महसूस करने लगा। परेशान अभिभावक ने महाविद्यालय के खिलाफ धोखाधड़ी को लेकर एक परिवाद न्यायालय में दर्ज कराया है, जहां न्यायाधीश ने स्थानीय पुलिस को तत्कालीन प्राचार्य, उपप्राचार्य, कॉलेज निदेशक नवलसिंह जैन सहित प्रबंध समिति के खिलाफ प्रकरण दर्ज करते हुए अनुसंधान कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

परिवाद में बताया गया कि स्थानीय श्री प्राज्ञ महाविद्यालय प्रशासन ने 48 फीसदी अंक होने के बावजूद गुलाबपुरा निवासी रचित त्रिवेदी पुत्र भूपेन्द्र त्रिवेदी को बीबीए प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश दे दिया। प्रवेश देने के बाद बकायदा सालाना परीक्षाओं के लिए कॉलेज प्रशासन ने विद्यार्थी से परीक्षा फार्म भी ऑनलाइन भरवा दिया और परीक्षा से पूर्व छात्र को प्रवेश पत्र भी मिल गया। परीक्षा देने के बाद जब बीबीए प्रथम सेमेस्टर का रिजल्ट आया लेकिन रचित का रिजल्ट विश्वविद्यालय ने रोक दिया। ऐसे में रचित और उसके पिता कॉलेज स्टॉफ से मिले और रिजल्ट रोके जाने का कारण जानना चाहा तो कॉलेज प्रशासन टालमटोल में लगा रहा। कई दिनों बाद भी रिजल्ट नहीं आया, ऐसे में दूसरे सेमेस्टर के भी प्रवेश शुरू हो गए।

इस पर रचित के पिता कॉलेज पहुंचे तो कॉलेज प्रशासन ने यह कहते हुए कि रिजल्ट तो आ जाएगा आप तो इसका दूसरे सेमेस्टर में प्रवेश दिलाकर फीस जमा करवा दो। लेकिन परिणाम रोके जाने की हकीकत जानने के लिए भूपेन्द्र त्रिवेदी जब महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर पहुंचे तो वहां पता चला कि रचित तो बीबीए के लिए पात्र ही नहीं था, फिर भी उसे प्रवेश दे दिया इसलिए इसका परिणाम रोका गया है। यह सुनते ही भूपेन्द्र के होश फाकता हो गए। अपने बेटे का एक साल खराब न हो इसके लिए उन्होने महाविद्यालय प्रशासन से कई बार विनती की लेकिन कॉलेज प्रशासन ने त्रिवेदी की पीड़ा को कतई नहीं समझा और पीडि़त को कई बार कॉलेज के चक्कर कटवाए। आखिरकार त्रिवेदी थक हारकर न्यायालय की शरण पहुंचे और अधिवक्ता के जरिए परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की पैरवी एडवोकेट मनोज कुमार जैन कर रहे हैं।

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