फिर संक्रमण की आहट

सरकार भले ही सख्ती करे या फिर रियायत लेकिन कोरोना की नीयत ऐसी नहीं है। ऐसे में हमें हमारा अपना व्यवहार, दिनचर्या, सतर्कता, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और गाइडलाइन की अक्षरश: पालना ही कोरोना संक्रमण से बचा सकता है।
राज्य में कोरोना संक्रमण की रफ्तार ने चिंता बढ़ा दी है। यह चिंता जायज तो है ही चिंतित करने वाला भी है। गत वर्ष कोरोना का साया लगभग पूरे साल रहा। कोरोनाकाल में लगाए गए सम्पूर्ण लॉकडाउन का अहसास भी है। होना भी चाहिए। गत वर्ष मार्च के बाद त्यौहारी सीजन में बाजार में हलचल शुरू हुई थी। सब कुछ तो नहीं पर बहुत कुछ पटरी पर लौटने लगा था लेकिन देश और राज्य में कोरोना के बढ़ते संक्रमण ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। यह चिंता वाजिब भी है। कोरोना संक्रमण का डर अभी भी आमजनों के जेहन से नहीं गया है तो वहीं लॉकडाउन में उत्पन्न समस्याएं भी लोगों के स्मृति पटल पर है।

बिजयनगर व गुलाबपुरा का स्थानीय बाजार बहुत कुछ सावों पर निर्भर करता है, जहां शहर के अलावा ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहक खरीदारी करने पहुंचते हैं। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सख्ती से निसंदेह बाजार और उद्योग-व्यापार प्रभावित होगा, इसमें संदेह नहीं किया जाना चाहिए। अब जबकि कोरोना संक्रमण की रफ्तार गत वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है, लोगों को स्वत: ही गाइडलाइन का पालन कर स्वयं, अपने परिवार और समाज को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए अनुशासन में लाना होगा। पहले भी यही विकल्प शेष था और आज भी यही है। वहीं स्वप्रेरणा से अस्पतालों में जाकर टीकाकरण करवा कर स्वयं और अपने परिवार को सुरक्षित करने की परिपाटी पर अमल करना होगा। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए यही कारगर उपाय है।

पुन:श्च, खारीतट संदेश पूर्व में भी इसी कॉलम में अपने पाठकों को आगाह करता रहा है कि छूट सरकार ने दी है कोरोना ने नहीं। आज भी कोरोना किसी को किसी तरह की रियायत देने के मूड में नहीं है। सरकार भले ही सख्ती करे या फिर रियायत लेकिन कोरोना की नीयत ऐसी नहीं है। ऐसे में हमें हमारा अपना व्यवहार, दिनचर्या, सतर्कता, मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और गाइडलाइन की अक्षरश: पालना से ही कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। जयहिन्द।
दिनेश ढाबरिया, सम्पादक

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