क्वालिटी से समझौता नहीं, स्वाद का सानी नहीं

हुनर : बिजयनगर के सूर्यप्रकाश व्यास देश ही नहीं विदेश में लोगों को चखा रहे हैं राजस्थानी ढाबे का स्वाद
बिजयनगर। यूं तो स्वाद की दुनिया में राजस्थानी व्यंजनों की कोई सानी नहीं। बिजयनगर के सूर्यप्रकाश व्यास राजस्थानी ढाबे के माध्यम से राजस्थानी व्यंजनों का स्वाद देश ही नहीं विदेशों में भी लोगों को चखा रहे हैं। राजस्थानी ढाबा व्यवसाय शुरू करने के पीछे मेरे परिवार के संस्कार और पिताजी की सीख थी कि खाने की क्वालिटी के साथ कभी भी समझौता नहीं करना है। पिताजी की ही सीख और आशीर्वाद से मैं आज इस मुकाम पर हूं।

स्थानीय मोती मार्केट के सामने महावीर बाजार में पिताजी स्व. बालमुकन्द व्यास ने वर्ष 1951 में स्थापित किया था। 10 के दशक से मैं स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद ढाबे पर बैठने लगा। कुछ वर्षों में ही मैंने इलेक्ट्रोनिक्स का व्यवसाय शुरू किया लेकिन उसमें सफलता नहीं मिलने के बाद गणेश टिफिन सेंटर सन् 2002 में शुरू किया। फिर मैंने जनवरी 2003 में गणेश केटर्स के नाम से केटरिंग और राजस्थानी ढाबे का कार्य शुरू किया।

सभी जगह होती है खाने की प्रशंसा
राजस्थानी खाने सहित सभी प्रकार के भारतीय व्यंजन पूरे भारत में प्रशंसनीय हैं। कोलकाता को छोड़कर पूरे भारत में गणेश केटर्स की स्टॉलें लगा चुका हूं, और सभी जगह खाने की प्रंशसा हुई है। इसी क्रम में अभी 9-10 दिसम्बर 2017 को कालूतारा (श्रीलंका) के अन्तरा रिसोर्ट एंड स्पा में राजस्थानी खाने के साथ-साथ सभी तरह के भारतीय व्यंजनों की स्टॉलें बुक थी। खाने को श्रीलंकाई लोगों ने खूब सराहा और बताया कि इंडिया में इतने प्रकार के खाने के आइटम बनते हैं और इतने स्वादिष्ट, हमें पता नहीं था।

ट्रायल में पास हुआ तो बुक हो गई होटल
गुजरात व महाराष्ट्र में राजस्थानी खाने को विशेषकर पसंद किया जाता है। एक उदाहरण है कि नाथद्वारा से आगे उदयपुर रोड पर देलवाड़ा में एक देवीगढ़ पैलेस नाम से होटल है उसमें लंदन की एक भारतीय पार्टी उदयपुर में शादी करने आई थी जिसने उदयपुर के सभी फाइव स्टार होटल बुक किए थे सिर्फ राजस्थानी खाने के लिए देवीगढ़ पैलेस होटल से बात चल रही थी वहां राजस्थानी खाने का ट्रायल हुआ जिसमें कई लोग फैल हो गये अब पार्टी ने होटल बुक करने से मना करने का कारण बताया तो होटल वाले ने कही से मेरा नम्बर लेकर मुझसे बात करके जल्दी खाने का ट्रायल देने की बात कही और बताया कि यदि ट्रायल पास हो गया तो होटल बुक हो जाएगी। मैंने पार्टी को ट्रायल दिया। ट्रायल पास होते ही होटल बुक हो गई। यह खासियत है राजस्थानी खाने की।

400 प्रकार के व्यंजनों का चार्ट
हमारे पास 400 से भी अधिक तरह के व्यंजनों के चार्ट है। चार्ट देखकर जो आइटम पार्टी बुक करती हैं वो बनाकर उनको परोसा जाता है। मुख्यत: ड्राई फ्रूट्स की मिठाई, राजस्थानी सब्जियां, मोटी रोटी, गेहूं का खीचड़ा, मक्की का खींचड़ा, मक्की, बाजरे व गेहूं की राबड़ी, मक्की के ढोकले (सीजन के अनुसार), चिंलगोजा की खीर, मावा कचौरी, आम कलाकंद, दाल-बाटी-चूरमा, सभी तरह के रायते, मक्की व चावल का ओल्या, खींचे, पापड़, तल्वा ग्वार फली, राम खीचड़ी, काबुली पुलाव, लहसुन-काचरे की चटनी व आलू-प्याज की सब्जी आदि हैं।

भाषा को लेकर होती है कभी-कभी समस्याएं
विदेशों में मसालों व बर्तनों की उपलब्धता सम्बंधित होटल में पता की जाती है। जो सामग्री वहां नहीं होती है वो हम लोग भारत से ही साथ लेकर जाते हैं। अभी श्रीलंका गया तब वहां बेसन, कई तरह के मसाले और कड़ाही नहीं मिले। भाषा को लेकर भी परेशानी हुई। ऐसे में हम एक गढ़वाली सैफ को लेकर यहां से गए थे इससे हमें परेशानी नहीं हुई।

हम लोग देश के जाने-माने केटर्स के साथ मिलकर काम करते हैं। देश में फैडरेशन ऑफ ऑल इंडिया केटर्स नाम से एक एसोसिएशन बनी हुई है जिसका मैं मेम्बर हूं। मैंने मुम्बई के फूडलिंग केटर्स, पापुलर केटर्स, सुमित्रा केटर्स, सहारा स्टार होटल और अहमदाबाद के फ्लेवर केटर्स, वी पुरोहित केटर्स, अमर केटर्स व जोधपुर के शुभ केटर्स, विनायक केटर्स, गणपति केटर्स और जयपुर के ज्ञानजी केटर्स, घासी महाराज जी केटर्स, जसय ऑबराय केटर्स, श्री अग्रवाल केटर्स, कान्हा स्वीट्स एंड केटर्स, महाराजा केटर्स, अग्रवाल केटर्स, वालिया केटर्स, प्रभात केटर्स साथ ही श्री पोर्ट रेस्टोरेंट नई दिल्ली के साथ हम लोगों का काम होता है।

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