संयम है जरूरी

स्मरण रहे, कोरोना की लहर भले ही कम हुई है लेकिन उसका प्रकोप आज भी जानलेवा है। कोरोना की दूसरी लहर और तीसरी लहर के बीच आमजन को बेहद संयम का परिचय देना होगा। स्वयं व परिवार के लिए यह जरूरी है।

कोविड 19 (कोरोना महामारी) की दूसरी लहर का प्रकोप और तीसरी लहर की आशंका के बीच शहर-कस्बा अब धीरे-धीरे अनलॉक होने लगा है। इस बीच कोरोना ने दूसरी लहर में हजारों लोगों को लील लिया। कई परिवारों पर तो कोरोना ने कहर बरपा दी। उद्योग-धंधे चौपट हो गए। हजारों-लाखों के रोजी-रोजगार छिन गए। फिलहाल, राहत की बात यह कि जांच के बाद कोविड पॉजीटिव मरीजों के अनुपात में काफी कमी आई है। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की भी आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि तीसरी लहर भी खतरनाक साबित होगी। ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए अधिक से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन जरूरी है।

अफसोस यह कि कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन को ‘संतोषजनक’ नहीं कहा जा सकता। अभी भी कई लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। जबकि कोरोना ने दूसरी लहर में महानगर से लेकर छोटे-छोटे कस्बों तक में अपना रौद्र रूप दिखा चुका है। ऐसे में कोरोना के किसी भी लहर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन करवाना अत्यंत जरूरी है। हालांकि केन्द्र व राज्य सरकार से लेकर सामाजिक व राजनीतिक संगठन वैक्सीनेशन के लिए आमजन को प्रेरित कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी भी कई लोग कोरोना से बचाव के लिए पहला टीका भी लगवाने से वंचित हैं। यह अफसोसजनक ही नहीं, दु:खद भी है। जांच के बाद कोरोना पॉजीटिव मरीजों की संख्या में आई कमी वाकई राहत वाली है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि वैक्सीन की अब जरूरत ही नहीं। दरअसल, यह कमी सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाए जाने के बाद आवागमन में आई कमी के कारण हुई है। कोरोना तो अभी भी घात लगाए बैठा है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

कोरोना से बचाव का अचूक उपाय यही है कि गाईडलाइन का अक्षरश: पालन किया जाए। मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग तो जरूरी है ही, बार-बार साबुन से हाथ धोने से लेकर हाथों को सेनेटाइज करना नहीं भूलना चाहिए। सच तो यह है कि अभी कई महीने तक कोरोना से बचाव के लिए उसके ‘उपायÓ के साथ जीना होगा। इसे दिनचर्या में शामिल करना ही होगा। स्मरण रहे, कोरोना की लहर भले ही कम हुई है लेकिन उसका प्रकोप आज भी जानलेवा है। कोरोना की दूसरी लहर और तीसरी लहर के बीच आमजन को बेहद संयम का परिचय देना होगा। स्वयं व परिवार के लिए यह जरूरी है।
जयहिन्द।

दिनेश ढाबरिया, सम्पादक

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