गुरु शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है: आर्य

  • Devendra
  • 29/07/2021
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बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) गुरु पूर्णिमा के अवसर पर स्थानीय आर्य समाज मंदिर में आर्य समाज प्रधान जगदीश आर्य ने यज्ञ हवन करने के पश्चात भजनोपदेश देते हुए बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतवर्ष में प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को हर्षोल्लास से मनाया जाता है, इस दिन प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने गुरु के पास पहुंचकर उनसे आशीर्वचन लेता है एवं श्रद्धानुसार भेंट करता है। वैदिक व्यवस्था में गुरु शब्द का विशेष महत्व है। ‘गु’ अर्थात् अंधकार ‘रु’ अर्थात् प्रकाश। गुरु शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। गुरु ज्ञान से पूर्ण होता है जबकि शिष्य शून्य होता है, तब गुरु अपने ज्ञान रुपी प्रकाश से शिष्य के अज्ञान रुपी अंधकार को दूर करता है और आने वाले समय में शिष्य को गुरु पद पर आसीन कराता है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार पूर्णिमा का चन्द्रमा पूर्ण होता है उसी प्रकार गुरु भी ज्ञान से पूर्ण होता है और अपने शिष्य के अज्ञान को धीरे-धीरे ज्ञान में परिवर्तित करता है। यह परम्परा सहस्त्र वर्षो से चली आ रही है। इस परम्परा से आने वाली पीढिय़ों में ज्ञान का विस्तार होता जाता है और संस्कृति बनी रहती है, जिसका प्रमाण हमारी वैदिक संस्कृति है।

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