जीवन सुखमय और शांतिमय तरीके से जीएं: विजयराज जी म.सा.

  • Devendra
  • 29/07/2021
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बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) महावीर भवन में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य प्रवर पूज्य श्री विजयराज जी म.सा. ने अरिहन्त बौधि क्लास में मौजूद जिज्ञासु श्रावक-श्राविकाओं को प्रात:कालीन पुनित बेला में पढ़ाते हुए जीवन सुख शांतिमय जीया जाये का पाठ पढ़ाते हुए एक पिता की पुत्र को क्या सीख हो उक्त विषय पर महत्वूपर्ण बातों का बोध देते हुए बताया कि जीवन को संयमित-नियमित दिनचर्या से जीना चाहिए, अप्रिय बातों को दिल से भुला देना चाहिए, यथा संभव स्वयं को व्यस्त रहना चाहिए, जो भी समस्या आए उसका समाधान खोजना चाहिए, चिंता करके स्वास्थ्य को खराब नहीं करना चाहिए, सबको समभाव और सम्मानपूर्वक सहन करना चाहिए, बुरा क्या हो सकता है यह स्वयं से पूछना चाहिए, यथा शक्ति दान देते रहना चाहिए, सब कुछ ठीक है और ठीक हो जायेगा इस समझ को विकसित करना चाहिए। इसी प्रकार म.सा. श्री ने बताया कि पिता-पुत्र का सम्बंध आत्मीयता का होता है, प्रत्येक पिता अपने पुत्र को सवाया बनाना चाहता है, अच्छे संस्कार देना चाहता है क्योंकि संस्कार ही सबसे बड़ी पूंजी है, धन दौलत तो गौण है। सुसंस्कारों से ही चरित्र का निर्माण होता है।
प्रणाम एक फायदे अनेक
श्री विजयराज जी म.सा. से बौद्धि क्लास के माध्यम से श्रावक-श्राविकाओं को प्रणाम एक फायदे अनेक पर प्रवचन देते हुए कहा कि प्रणाम में कई फायदे है जैसे प्रेम, विनम्रता, अनुशासन, शीतलता, आदर, सुविचार, क्रोध का त्याग, अहंकार की समाप्ति आदि। उन्होंने कहा कि जो पिता के चरणों में प्रणाम करता है वह कभी गमगीन नहीं होता। जो माता को प्रणाम करता है वह भाग्यहीन नहीं होता। जो भाई के चरणों में प्रणाम करता है वह पुण्यहीन नहीं होता, जो बहन के चरणों में प्रणाम करता है वह चरित्रहीन नहीं होता। जो गुरु के चरणों में प्रणाम करता है उस जैसा कोई खुशनसीब नहीं होता।
तपस्वी बहिन का बहुमान
मंगलवार को प्रवचन के पश्चात आठ की तपस्या कर रही तपस्वी बहन श्रीमती चन्द्रकांता बरडिय़ा धर्मपत्नी ललित बरडिय़ा पुत्री गुमानमल लोढ़ा का वद्र्धमान जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में तपस्वी भाई शांतिलाल बोहरा द्वारा अभिनन्द पत्र भेंट कर बहुमान किया गया।

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