अस्त हो गया जिन शासन का दिव्य सितारा

  • Devendra
  • 18/05/2022
  • Comments Off on अस्त हो गया जिन शासन का दिव्य सितारा

आचार्य नानेश के शिष्य शांति मुनि जी मसा. का देवलोकगमन
गुणानुवाद सभा में वक्ताओं ने म.सा. की जीवनी पर प्रकाश डाला

बिजयनगर। आचार्य नानेश के शिष्य एवं आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. आदि ठाणा 1008 के आज्ञानुवर्ति ध्यान योगी गणाधिपति श्री शांति मुनि जी म.सा. का गत दिवस अजमेर के सुन्दरविलास स्थित तेरापंथ भवन में प्रवास के दौरान देवलोकगमन हो गया। श्री शांति मुनि जी म.सा. 77 वर्ष के थे। म.सा. के देवलोकगमन के समाचार मिलते ही जैन समाज में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को पुष्कर रोड स्थित श्मसान घाट पर उनका हजारों श्रावकों की मौजूदगी में विधिवत रूप से अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान श्री हुक्मगच्छीय साधुमार्गी शांत क्रांति जैन श्रावक संघ के राष्ट्रीय पदाधिकारी रिद्धकरण सेठिया, म.सा. श्री के सांसारिक भतीजे पुखराज स्वरूपिया, मुकेश, राकेश, संजय, प्रदीप सहित जैन समाज के लोगों ने कपूर से सामूहिक रूप से मुखाग्नि दी। इस दौरान बिजयनगर से ताराचन्द बोहरा, सुभाष लोढ़ा, पवन बोहरा, विकास बोहरा, शांतिलाल कर्नावट, राजेश नाहटा, चंदनबाला कोठारी, शांतिलाल बोहरा, अनिल नाबेड़ा सहित सैकड़ों धर्मावलम्बी मौजूद रहे। इससे पूर्व म.सा. के अंतिम दर्शनों के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब आगमन प्रस्थान के रूप में तेरापंथ भवन में एकत्रित होता रहा। जैसे ही म.सा. की डोल यात्रा तेरापंथ भवन से आरम्भ हुई तो श्रावकों के मुंह से अनायास एक ही शब्द निकल रहा था ‘जिन शासन का दिव्य सितारा आज अस्त हो गया’।

गुणनुवाद सभा में बीते चातुर्मास की यादें हुई ताजा
सुभाष लोढ़ा ने बताया कि म.सा. श्री के देवलोकगमन के समाचार मिलते ही स्थानीय जैन समाज में शोक की लहर छा गई। 14 मई को बड़े स्थानक में एक घंटे का नवकार जाप, 4 लोगस का उच्चारण किया गया। 15 मई को सुबह 9 बजे बड़े स्थानक में दिवाकर सम्प्रदाय के श्री केशव मुनि जी म.सा. आदि ठाणा 2 के सानिध्य में गुणानुवाद सभा आयोजित की गई जिसमें स्थानीय संघ के मंत्री ज्ञानसिंह सांखला, उपमंत्री प्रकाश बड़ौला, जीसी जैन, सम्पत छाजेड़ आदि वक्ताओं ने श्री शांति मुनि जी म.सा. की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए गुणानुवाद किया। उन्होंने बताया कि बीते चातुर्मास में आचार्य श्री विजयराज जी म.सा. के साथ उनका चातुर्मास ऐतिहासिक रहा जिसकी यादें आज फिर ताजा हो गई।

मृदुल व्यवहारी एवं ज्ञान के धनी थे म.सा.
नवकार परिवार के सुभाष लोढ़ा ने बताया कि शांतिमुनि जी म.सा. सहृदयी, मृदुल व्यवहारी, स्पष्ट वक्ता एवं ज्ञान के धनी थे। म.सा. सदैव शांत स्वभाव में रहते हुए अपने अन्दर समाये ज्ञान को श्रावक-श्राविकाओं को बांटने में रहा करते थे। म.सा. श्री के बिजयनगर के बीते चातुर्मास को बिजयनगर ही नहीं वरन् देशभर के अनुयायियों को याद रहेगा, यहां आचार्य विजयराज के सान्निध्य में चार माह तक ध्यान, तप, त्याग की लड़ी लगी रही। इस दौरान म.सा. श्री ने अपने सहृदय, संवदेशील कवि, मधुर गीतों के साथ अपने विचारों से हजारों श्रावकों को प्रभावित किया।

एक युग का अंत
आचार्य नानेश के शिष्य महास्थिवर, श्रमण श्रेष्ठ, ध्यान योगी, पंडित रत्न, गणाधिपति शांति मुनि जी म.सा. का जन्म चित्तौडग़ढ़ जिले के ग्राम भदेसर में 29 मई 1945 को हुआ था। उनके पिता डालचन्द और माता लहरी बाई का साया तीन वर्ष की अवस्था में सिर से उठ गया। तब उनका लालन-पालन उनके बड़े भाई ने किया। 24 फरवरी 1963 को 16 वर्ष की आयु में आचार्य नानालाल महाराज के सान्निध्य में भगवती दीक्षा अंगीकार की। उन्होंने अध्ययन करते हुए जैन सिद्धांत अलंकार की परीक्षा सन् 1972 में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उन्होंने जैनागम, पिटकों, टीका, चूर्णि, भाष्य, न्याय दर्शन आदि ग्रंथों का गहन अध्ययन, चिंतन, मनन एवं अनुशीलन द्वारा सुविज्ञता दक्षता प्रकट कर साहित्य के क्षेत्र में एक अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया था।

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com
Skip to toolbar