‘गुरुवाणी को करें आत्मसात’

  • Devendra
  • 16/06/2022
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गत दिनों सिख गुरु तेगबहादुर जी महाराज के 400 साला प्रकाश पर्व पर बिजयनगर स्थित गुरुद्वारे में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। खास बात यह रही कि अजमेर रेंज के आईजी रूपेन्द्र सिंह व उनकी धर्मपत्नी डॉ. हरप्रीत कौर ने गुरुवाणी में गुरुओं की कही बातों का उल्लेख करते हुए गुरुवाणी को आत्मसात करने पर बल दिया।

बिजयनगर। (खारीतट सन्देश) जिन्होंने गुरुवाणी ने सुनी, इतिहास नहीं पढ़ा वो लोग सिर्फ गुरुदेवों का चित्र देखते हुए बड़े हुए हैं। लेकिन जब हम गुरुदेव की जीवनी पढ़ते हैं, उनकी गुरुवाणी सुनते हैं या उनका इतिहास पढ़ते हैं तो पता चलता है कि गुरुदेव तेगबहादुर का नाम तलवार चलाने में निपुण होने की वजह से रखा गया। पुराने समय में लोगों की यात्राओं का मकसद नई खोज करना होता था आज भी होता है, लेकिन गुरु साहब कश्मीर, पंजाब, यूपी, बिहार, बंगाल, असम, बंगलादेश से भी आगे तक उन्होंने यात्राएं की। उनकी यात्रा का मकसद कई राजाओं के मध्श् संधि कराने, युद्ध की स्थिति में शांति बहाल कराना था। यह बात गत दिवस गुरु तेगबहादुर के 400 साला प्रकाश पर्व के अवसर पर ट्रस्ट गुरुसिंह सभा बिजयनगर एवं माधव सेवा समिति के तत्वावधान में गुरुद्वारा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजमेर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रूपेन्द्रसिंह ने कही।

डॉ. हरप्रीत कौर ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुवाणी और गुरूद्वारा में दिए गए प्रवचन को आत्मसात करना जरूरी है, नहीं तो यह निरर्थक है। प्रकाश पर्व मनाने का मकसद यहां आकर सुनना और लंगर चख के घर चले जाने का कोई अर्थ नहीं है। उन्होंने कहा कि गुरुवाणी के मुताबिक ब्रह्मजीवन धारण किए व्यक्ति में कई गुण होते है और उनको क्रोध तो कतई नहीं आता। यह अवस्था सिर्फ गुरु की कृपा होने पर ही हमें प्राप्त हो सकती है अन्यथा नहीं। गुरुवाणी में यह भी बताया गया कि संसार नश्वर है, साथ में कुछ नहीं जाना। उन्होंने कहा कि जीवन मुक्ति के लिए मरने की आवश्यकता नहीं है। आप जीवन मुक्ति (मोक्ष) जीते जी भी पा सकते है इसके लिए आप काम, क्रोध, वासना, इच्छाएं, विकार, मोह, आशा, मनसा आदि से मुक्त हो जाइए, पुलिस महानिरीक्षक रूपेन्द्रसिंह ने कहा कि जीवन की आखिरी अवस्था है राम नाम जपने की, इसके बाद मरना है और जीवन मुक्ति हो जाएगी। ऐसा नहीं है।

जो कुछ करता है वो परमात्मा ही करता है
हमारे देश में जिसके पास पॉवर आ जाती है चाहे वो ऑफिसर हो, नेता हो, अमीर हो, चोह गुणी व्यक्ति हो, रूतबे वाला हो, कोई श्रेष्ठ सम्मानित व्यक्ति हो ऐसे में वे अहंकार में आ जाता है। ऐसे में वे समझने लगते हैं कि यह मेरे ही कारण हो रहा है, मैंने ही किया है। लेकिन वास्तविकता यह है कि यह सब आपने नहीं किया परमात्मा ने आपसे करवाया है।

मानवाधिकार को प्रोत्साहन दिया गुरुदेव ने
सिंह ने कहा कि जिसके मन में मानवाधिकार से प्यार हो तो वो सभी के लिए अपना बलिदान दे सकता है। गुरुदेव ने अपने जीवन काल में मानवाधिकार को भरपूर प्रोत्साहन दिया है। उन्होंने बताया कि हम लोग अक्सर बाहर तो लड़ाई करते हैं फिर मंदिर, गुरुद्वारा सहित अन्य देवीय स्थानों पर जाकर माथा टेकते हैं। बाहर कोई भूखा है तो उसे कुछ नहीं देंगे लेकिन यहां लंगर लगा देंगे। लंगर नहीं तो दान और चढ़ावा दे देते हैं। यह बहुत बड़ी विडम्बना है। भूखे से तात्पर्य सिर्फ यह नहीं है कि वह खाने के लिए भूखा है। किसी के पास कपड़ा नहीं तो वह भी भूखा है।

युवाओं के लिए संदेश
डॉ. कौर ने युवाओं को संबोधित करते हुए बुरी संगत से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बुरी संगत आपके बुरे दोस्त भी हो सकते हैं, जो आपको आपकी पढ़ाई से, आपके पेरेंट्स से, आपके संस्कारों और गुरुओं से दूर कर रहे है, ऐसे में आप बड़ों का आदर नहीं करते हैं क्योंकि आपको आपके फ्रेंड्स ज्यादा अच्छे लगते हैं और माता-पिता बुरे। अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो मानकर चलिए वो आपको अपने मां बाप से दूर करके रहेंगे, ऐसे फ्रैंड्स कभी अच्छे नहीं हो सकते। डॉ. कौर ने बताया कि जो फ्रेंड्स आपको गुरुदेव, पढ़ाई, मां-बाप और अच्छे संस्कारों से दूर कर रहा हैं उसके लिए जरूरी नहीं कि वो फ्रेंड्स ही हो, वो कोई इलेक्ट्रोनिक्स गैजेट्स भी हो सकता है। युवा लोग अधिकतर इलेक्ट्रोनिक्स गैजेट्स पर इतना समय देते हैं जितना तो वो अपने माता-पिता, भाई-बहन, गुरुजनों और पढ़ाई को भी नहीं देते। वो सिर्फ और सिर्फ व्हाटसअप चैट, फेसबुक, गेम आदि पर लगे रहते हैं। डज्ञॅ. कौर ने इन गैजेट्स से भी दूरी बनाने की सलाह दी। गुरुवाणी में भी इससे दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने हर जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने का आव्हान किया।

जरूरतों और गुस्से को नियंत्रित रखें
डॉ. कौर ने कहा कि आप अपनी जरूरतों को पूरी तरह से नियंत्रित रखे, देखादेखी नहीं करे और फिजूलखर्ची कतई नहीं। गुस्से को जहां तक हो सके नियंत्रित रखें क्योंकि गुस्से से कई बार बातें बनते-बनते बिगड़ जाती है, पारिवारिक रिश्ते टूट जाते हैं। कई बार गुस्से के कारण बड़ा अपराध भी हो जाता है।

गुस्से में नहीं करें कोई फैसला
रूपेन्द्र सिंह ने कहा कि गुस्से में कतई कोई फैसला नहीं करें। अगर फैसला कर भी दिया हो तो उसे तुरंत रद्द कर देना चाहिए। ऐसे विवाद अक्सर परिवारों में होते है, भाई-भाई, बहन-भाई, पति-पत्नी और मां-बाप और बच्चों यहां तक कि पड़ोसियों में झगड़े हो जाते है। ऐसे मामले पुलिस विभाग में बहुत आते है। अगर हमने गुस्से को कंट्रोल कर लिया तो समाज में भी नवीन ऊर्जा का प्रसार होगा और सभी जगह झगड़े भी कम हो जाएंगे। बात बात पर गुस्सा करने से व्यक्ति के व्यक्तित्व पर असर डालता है।

बच्चों को अच्छी पॉजीशन बनानी है, नकल वाली नहीं
रूपेन्द्रसिंह ने बच्चों को अधिक से अधिक मेहनत करते हुए अच्छी पॉजीशन बनाने की बात कही, उन्होंने कहा कि पॉजीशन बनाने के लिए नकल या बेईमानी का कतई सहारा नहीं लेना है।

नेट ग्लोबाईजेशन से दुनिया छोटी और हमारी नागरिकता बड़ी हो गई
सिंह ने कहा कि आजकल इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में क्षणभर में सूचना प्राप्त की जा सकती है या भेजी जा सकती है। ऐसे में दुनिया छोटी और हमारी नागरिकता बड़ी हो गई है। इससे पूर्व हम जहां रहते थे वहीं तक सिमटे हुए रहते थे। इसलिए अब हमें बड़ी सकर्तकता के साथ सकारात्मकता के साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ी है। पहले हम सिर्फ परिवार की ही सोचते थे लेकिन अब हमें पूरी दुनिया की सोचकर चलना है।

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