ज्ञान ही हमारा सबसे बड़ा मित्र: आर्य

  • Devendra
  • 23/06/2022
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बिजयनगर। स्थानीय आर्य समाज मंदिर प्रांगण में साप्ताहिक हवन एवं सत्संग कार्यक्रम के दौरान ‘तू है सच्चा पिता सारे संसार का ओम प्यारा, तू ही, तू ही है रक्षक हमारा…’ भजन की प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम के दौरान शाहपुरा से पधारे कन्हैयालाल आर्य ने भी भजनों की प्रस्तुति देकर सभी को धर्म लाभ प्रदान किया। सत्संग चर्चा के दौरान प्रधान जगदीश आर्य ने ‘सा विद्या या विमुक्तये’ विषय पर बताया कि विद्या से ही सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति प्राप्त होती है। विश्व में दु:खों का कारण हमारा अज्ञान है। जब हमें ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो ज्ञान के द्वारा हम कई प्रकार के कार्यों को आसानी से कर लेते है। विद्यालयों, गुरुकुलों, प्रशिक्षण केन्द्रों, शिविरों आदि के माध्यम से कई प्रकार की जानकारियां प्राप्त कर हम वर्तमान एवं भविष्य में आने वाले कष्टों से छुटकारा पाते हैं।

सांसारिक जीवन में ज्ञान ही हमारा सबसे बड़ा मित्र है जो हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर एवं मृत्यु से अमरता की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान के माध्यम से कर्म करके मानव (आत्मा) शरीर छोडऩे के बाद वापस किसी शरीर में प्रवेश नहीं करती और मुक्त (बिना शरीर वाली) हो जाती है। मुक्ति का ज्ञान वेदों के अनुसार हमें परम पिता परमेश्वर द्वारा ही प्राप्त होता है। वेद का अर्थ ही ज्ञान या जानकारी है, जो हमें सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त रखती है। परम पिता परमेश्वर ही पूरे ब्राह्मण में पूर्ण ज्ञानवान माना गया है। उसी के द्वार हमें सभी प्रकार के ज्ञान प्राप्त होते हैं और हम (आत्मा) शरीर के माध्यम से कर्म करके दु:खों से छुटकारा पाते हैं। ईश्वर हमें हमारी आत्मा में शरीर के माध्यम से समस्त प्रकार का ज्ञान प्रदान करता है और आत्मा शरीर के माध्यम से ही कर्म करके सभी प्रकार के बंधनों से मुक्त हो सकती है। इसलिए हमें परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए ज्ञान (विद्या) प्राप्त करके समस्त प्रकार दु:खों से छुटकारा प्राप्त करने का प्रयास करते रहना चाहिए। विधा दान ही ही सर्व श्रेष्ठ दान माना गया है।

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