पाक ने घुसपैठ नहीं रोकी तो सेना की कार्यवाही जारी रहेगी: आर्मी चीफ

नई दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि सीमा पर जारी सेना की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान को आतंकियों को भेजने के दर्द का अब अहसास होने लगा है। उन्होंने कहा कि पाक सैन्य चेक पोस्ट पर भारतीय सेना की गोलीबारी में भारत के मुकाबले चार गुना ज्यादा संख्या में पाकिस्तानी सैनिक मारे जा रहे हैं। सेना पाक सैन्य पोस्टों पर अपनी यह कार्रवाई तब तक जारी रखेगी जब तक वह आतंकी घुसपैठ कराना बंद नहीं करता।

सेना दिवस के पूर्व अपनी सालाना प्रेस कांफ्रेंस में जनरल रावत ने कहा कि पाक के सैन्य पोस्ट पर अब भी आतंकी बैठे हुए हैं और इसकी पक्की खबर मिलते ही हम कार्रवाई कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में सीमा पर भारतीय सैनिकों के शहीद होने की बढ़ती संख्या से जुड़े सवाल पर जनरल रावत ने कहा कि पाक के खिलाफ संघर्ष विराम तोड़ कर कार्रवाई की जा रही है। क्योंकि हमने सख्त कार्रवाई कर पाक सेना को यह संदेश नहीं दिया कि आतंकी घुसपैठ कराने का सिलसिला वह बंद नहीं करता तो हम उसके चेक पोस्ट को बर्बाद करते रहेंगे। सेना प्रमुख ने कहा कि हमारे जवानों की जितनी संख्या में शहादत हुई है उसे चार गुना ज्यादा पाक सैनिक हमने मारे हैं ताकि उसे आतंकी भेजने के दर्द का अहसास हो।

जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं को रोकने के लिए सेना प्रमुख ने वहां के सरकारी स्कूलों के साथ मदरसों और मस्जिदों के नजरिये में बदलाव की जरूरत बताई। जनरल रावत ने कहा कि मदरसों और मस्जिदों में वहां जो दृष्टिकोण दिया जाता है उस पर कुछ नियंत्रण लाने पर गौर करना चाहिए। सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों की हर कक्षा में दो नक्शे होते हैं।

भारत के नक्शे के साथ अलग से जम्मू-कश्मीर का नक्शा होने की वजह से बच्चों में शुरू से दो पहचान का बीज पनपता है। जबकि वहां पब्लिक स्कूलों और सीबीएससी स्कूलों में बच्चों में यह भावना नहीं दिखती। इसीलिए सरकार को सूबे में ऐसे स्कूल ज्यादा संख्या में खोलने पर गौर करना चाहिए।

घाटी में आतंकी घुसपैठ रोकने की रणनीति के बारे में सेना प्रमुख ने कहा कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद आतंकवाद के खिलाफ हमारा आपरेशन दक्षिण कश्मीर पर ज्यादा केंद्रित था। अब इस साल उत्तर कश्मीर पर फोकस ज्यादा रहेगा ताकि आतंकियों को सीमा पर घुसपैठ करते ही मार गिराया जाए और घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र दक्षिण कश्मीर में जाने से रोका जा सके।

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